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इंदौर के एमवाय अस्पताल में चूहों के कारण नवजात की मौत, सुरक्षा पर उठे सवाल

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BY: Yoganand Shrivastva

इंदौर: एमवाय अस्पताल (MYH) के न्यू-बॉर्न यूनिट (NICU) में चूहों के हमले के कारण एक नवजात की मौत ने शहर में चिंता बढ़ा दी है। बारिश के कारण चूहों के बिलों में पानी भर गया है, जिससे वे अस्पताल परिसर में प्रवेश कर रहे हैं। याद दिलाया जा सकता है कि 1994 में यहां पेस्ट कंट्रोल अभियान के तहत लगभग 12,000 चूहे मारे गए थे।

नवजातों पर हमला

अस्पताल में दो नवजातों के हाथ-पैर चूहों द्वारा कुतर दिए गए थे। इनमें से एक नवजात मंगलवार को दम तोड़ गया। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि मौत चूहों के हमले की वजह से नहीं हुई, बल्कि संक्रमण (इन्फेक्शन) कारण बनी। इस मामले पर चिकित्सा शिक्षा विभाग ने डीन से स्पष्टीकरण मांगा है।

स्टाफ में नाराज़गी

मामले में दो नर्सिंग ऑफिसरों को सस्पेंड किया गया और अन्य को शोकॉज नोटिस जारी किए गए। नर्सिंग स्टाफ का कहना है कि इसमें उनका कोई दोष नहीं है, बल्कि जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों को कार्रवाई के लिए निशाना बनाना चाहिए था।

चूहों के बढ़ते खतरे के कारण

एमवाय अस्पताल और पास के सरकारी अस्पतालों – चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय, कैंसर अस्पताल, टीबी अस्पताल और चेस्ट सेंटर – में चूहों की संख्या बढ़ रही है। प्रशासन का कहना है कि बारिश के कारण परिसर में झाड़ियां उग गई हैं और चूहों के बिलों में पानी भर गया, इसलिए उनका मूवमेंट बढ़ गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि असल कारण अस्पताल परिसर में उपलब्ध भोजन है। मरीजों के अटेंडर वार्ड तक भोजन सामग्री लाते हैं, जिससे चूहों को आसानी से खाना मिल जाता है। ग्लूकोज और दवाइयों से भी चूहों की ऊर्जा बढ़ती है, जिससे उनकी प्रजनन क्षमता में इजाफा होता है और वे अधिक सक्रिय हो जाते हैं।

नियंत्रण के प्रयास

अस्पताल ने NICU में चूहों के संभावित रास्तों को प्लाईवुड से बंद कर दिया है और यूनिट में केवल दो नवजात मौजूद हैं। स्टाफ उनकी निगरानी कर रहा है। इसके अलावा, हर 15 दिन में पेस्ट कंट्रोल का दावा किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार चूहों पर नियंत्रण किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए उनकी जीवन-चक्र और आदतों को समझना जरूरी है।

ऐतिहासिक पेस्ट कंट्रोल अभियान

1994 में तत्कालीन कलेक्टर डॉ. सुधीरंजन मोहंती ने एमवाय अस्पताल में व्यापक चूहा मारो अभियान चलाया था। 10 दिनों में पूरे परिसर से छोटे-बड़े 12,000 चूहे मारे गए थे। 2014 में भी पेस्ट कंट्रोल किया गया था, तब लगभग 2,500 चूहे मरे थे।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्रतिक्रियाएँ

पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एमवाय अस्पताल में यह पहली बार नहीं हुआ। उनका कहना था कि नवजातों को चूहों ने नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही ने नुकसान पहुँचाया है।

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