भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एनडीटीवी डिफेंस समिट 2025 में अमेरिकी टैरिफ विवाद और भारत-चीन संबंधों के मुद्दे पर महत्वपूर्ण बयान दिया। उन्होंने कहा कि कोई भी देश परमानेंट दोस्त या दुश्मन नहीं होता, केवल “परमानेंट इंटरेस्ट” होता है।
अमेरिका और भारत के व्यापारिक रिश्ते
राजनाथ सिंह ने अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और उसके परिणामस्वरूप पैदा हुए व्यापारिक तनाव पर अपनी बात रखते हुए कहा कि दुनिया में ट्रेड वॉर जैसे हालात बन रहे हैं। उनका कहना था,
“हम किसी को अपना दुश्मन नहीं मानते, लेकिन हम राष्ट्रीय हित और लोगों के हित से कभी समझौता नहीं करेंगे।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए किसी भी दबाव को झेलने के लिए तैयार है।
राष्ट्रीय हित सर्वोपरि
राजनाथ सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा,
“हमारे लिए हमारे किसानों, छोटे व्यापारियों और देशवासियों का हित सबसे ऊपर है। चाहे कितना भी दबाव डाला जाए, लेकिन भारत किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।”
सिंह का यह बयान भारत की विदेश नीति और व्यापारिक संबंधों में उसकी स्वतंत्रता और सुरक्षा पर जोर देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट: 700 करोड़ से 24 हजार करोड़ तक
राजनाथ सिंह ने भारत के रक्षा निर्यात में हुई भारी वृद्धि का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि 2014 में भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट 700 करोड़ रुपए से कम था, लेकिन आज यह 24 हजार करोड़ रुपए तक पहुँच चुका है, जो एक रिकॉर्ड स्तर पर है।
“यह दर्शाता है कि भारत अब केवल खरीदार नहीं बल्कि निर्यातक बन चुका है।”
इसका मतलब है कि भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को इतना मजबूत किया है कि वह अब अपनी स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का निर्यात भी कर रहा है।
पाकिस्तान और भारतीय वायुसेना की रणनीति
इस समिट में भारतीय वायुसेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नर्मदेश्वर तिवारी ने भी एक अहम जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान को युद्धविराम की मेज पर लाने के लिए भारतीय वायुसेना ने 50 से भी कम हथियार दागे थे।
वह कहते हैं,
“युद्ध शुरू करना बहुत आसान है, लेकिन उसे खत्म करना उतना आसान नहीं है।”





