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7 करोड़ की ऑनलाइन ठगी केस: 60 दिन में चार्जशीट दाखिल न कर पाई क्राइम ब्रांच, आरोपी को मिली डिफॉल्ट बेल

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BY: Yoganand Shrivastva

ग्वालियर। ऑनलाइन ठगी के एक बड़े मामले में चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। क्राइम ब्रांच समय सीमा के भीतर चार्जशीट पेश नहीं कर पाई, जिसके चलते आरोपी जतिन यादव को अदालत से डिफॉल्ट बेल मिल गई।


क्यों मिली जमानत?

जतिन यादव के खाते में लगभग 7 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ था। इस खाते का इस्तेमाल देशभर के करीब 100 अलग-अलग ठगी मामलों में किया गया है।

जतिन को 19 जून को गिरफ्तार किया गया था। भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (अधिकतम सजा 7 वर्ष) के तहत दर्ज मामलों में पुलिस को गिरफ्तारी के 60 दिन के भीतर चार्जशीट दाखिल करनी होती है। लेकिन इस केस में यह तय समय सीमा पूरी होने के बावजूद आरोप पत्र दाखिल नहीं हो सका।

21 अगस्त को आरोपी की ओर से एडवोकेट वैभव मिश्रा ने मजिस्ट्रेट कोर्ट में डिफॉल्ट बेल की अर्जी दी। इसके बाद कोर्ट ने सशर्त जमानत स्वीकार कर जतिन को रिहा करने का आदेश दिया।


पुलिस की देरी और खामियां

सूत्रों के अनुसार, 21 अगस्त की सुबह लगभग 11 बजे डिफॉल्ट बेल का आवेदन दाखिल हुआ, जबकि पुलिस ने उसी दिन दोपहर करीब 3 बजे चार्जशीट कोर्ट में पेश की। हालांकि तब तक कानूनी रूप से आरोपी को जमानत का अधिकार मिल चुका था।

दिलचस्प बात यह है कि डीपीओ (जिला अभियोजन अधिकारी) मनोज जैन ने साफ कहा कि उन्हें इस चालान पेश होने की जानकारी ही नहीं थी। उनका कहना था कि ग्वालियर पुलिस चार्जशीट दाखिल करने से पहले डीपीओ कार्यालय से समन्वय नहीं करती।

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