BY: Yoganand Shrivastva
भोपाल: कटनी की रहने वाली और इंदौर में रहकर सिविल जज की तैयारी कर रही 28 वर्षीय अर्चना तिवारी आखिरकार 13 दिन बाद नेपाल सीमा के पास बरामद कर ली गईं। सात अगस्त से लापता अर्चना को जीआरपी की टीम ने उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के पालियाकलां इलाके से पकड़ा और भोपाल लेकर आई। अब जीआरपी उनसे पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने की कोशिश करेगी।
कैसे हुई गुमशुदगी?
रक्षाबंधन पर घर जाने के लिए अर्चना ने इंदौर से नर्मदा एक्सप्रेस पकड़ी थी। वह एसी कोच की बी-3 सीट पर बैठी थीं। ट्रेन जब कटनी पहुँची तो उनके परिवारजन स्टेशन पर इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन अर्चना वहां नहीं उतरीं। कोच में उनका पर्स और कपड़े से भरा बैग मिला, जबकि वे खुद गायब थीं। यात्रियों ने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन के बाद से ही वह दिखाई नहीं दी थीं।
चाची से हुई थी आखिरी बात
यात्रा के दौरान अर्चना ने अपनी चाची से फोन पर बात की थी। उसी के बाद से उनका मोबाइल स्विच ऑफ हो गया। परिवार ने तुरंत जीआरपी को सूचना दी। जांच शुरू हुई तो आखिरी लोकेशन इटारसी में मिली। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज खंगाले और आसपास के इलाकों में खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
लगातार खोज में जुटी जीआरपी
इटारसी, नरसिंहपुर, जबलपुर और कटनी तक जीआरपी ने तलाश जारी रखी। रेडियो मैसेज के जरिए सभी थानों और एसपी को सूचना दी गई। इस बीच अर्चना की खोज में उनके परिजन भी लगे रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। 17 अगस्त को परिवारजन थककर घर लौट आए, जबकि पुलिस टीम तलाश जारी रखे रही।
कांस्टेबल से जुड़ा नाम
जांच आगे बढ़ी तो अर्चना का संपर्क ग्वालियर के भंवरपुरा थाने में पदस्थ आरक्षक राम तोमर से जुड़ा मिला। जीआरपी ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की। उसके मोबाइल रिकॉर्ड में सामने आया कि उसने अर्चना के लिए इंदौर से ग्वालियर का बस टिकट बुक कराया था। हालांकि, अर्चना ने उस टिकट पर यात्रा नहीं की। राम तोमर ने कबूल किया कि वह अर्चना से कॉल पर बातचीत करता था, लेकिन व्यक्तिगत मुलाकात नहीं हुई थी।
नेपाल सीमा पर मिलीं अर्चना
अंततः जीआरपी को सूचना मिली कि अर्चना नेपाल बॉर्डर के पास देखी गई हैं। पुलिस ने मौके पर दबिश दी और उन्हें सुरक्षित बरामद कर भोपाल ले आई। अब उनसे पूछताछ की जाएगी कि आखिर 13 दिन तक वे कहाँ रहीं और इस घटना के पीछे की असली वजह क्या थी।





