मध्यप्रदेश सरकार ने स्वतंत्रता दिवस पर राज्य की विभिन्न जेलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे 156 कैदियों को विशेष रिहाई देने का निर्णय लिया है। इस सूची में 6 महिला बंदी भी शामिल हैं। रिहाई का यह फैसला प्रदेश की संशोधित रिहाई नीति और जेल विभाग की सिफारिशों पर आधारित है।
भोपाल समेत कई जिलों से होंगे बंदी रिहा
- भोपाल सेंट्रल जेल – 25 बंदी
- उज्जैन – 14 बंदी
- सतना – 17 बंदी
- नर्मदापुरम – 11 बंदी
- बड़वानी – 3 बंदी
- ग्वालियर – 16 बंदी
- जबलपुर – 14 बंदी
- रीवा – 19 बंदी
- सागर – 14 बंदी
- इंदौर – 10 बंदी
- नरसिंहपुर – 6 बंदी
- अन्य जेलें – शेष बंदी
अच्छे आचरण वाले कैदियों को मिला मौका
इन सभी बंदियों ने जेल में सजा के दौरान अनुशासन बनाए रखा और किसी भी प्रकार के जेल नियमों का उल्लंघन नहीं किया।
जेल प्रशासन ने उन्हें रिहाई से पहले विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिए, जैसे:
- टेलरिंग (सिलाई)
- कारपेंट्री (बढ़ईगिरी)
- लोहारगीरी
- भवन निर्माण कार्य
इनका उद्देश्य यह है कि रिहाई के बाद वे आत्मनिर्भर बनकर समाज में सम्मानपूर्वक जीवन बिता सकें।
DG वरुण कपूर की सलाह
जेल महानिदेशक एवं सुधारात्मक सेवाओं के प्रमुख वरुण कपूर ने रिहा होने वाले बंदियों को अपराध से दूर रहने और जिम्मेदार नागरिक बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इन बंदियों को अब समाज की मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू करना चाहिए।
रिहाई नीति में बड़ा बदलाव
अब केवल गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर ही नहीं, बल्कि 15 नवंबर – राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस पर भी अच्छे आचरण वाले बंदियों को रिहाई का मौका मिलेगा।
इस कदम का उद्देश्य सुधार और पुनर्वास की प्रक्रिया को और मजबूत बनाना है।