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गाजा में तबाही का तांडव: इजरायली हवाई हमले में 93 की मौत, हमास की पकड़ कमजोर

गाजा में तबाही का तांडव: इजरायली हवाई हमले में 93 की मौत, हमास की पकड़ कमजोर

गाजा पट्टी एक बार फिर युद्ध के दर्द से कराह रही है। इजरायली सेना द्वारा लगातार किए जा रहे हवाई हमलों में मंगलवार को 93 लोगों की मौत हो गई। हमलों में महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं। शरणार्थी शिविरों को निशाना बनाकर की जा रही बमबारी से हालात और भी भयावह हो गए हैं। युद्ध विराम टूटने के बाद से गाजा में हो रही मौतों का यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा।


शरणार्थी शिविरों पर इजरायली बमबारी

  • मंगलवार को गाजा के शाती शरणार्थी शिविर पर बड़ा हवाई हमला हुआ।
  • इसमें हमास के एक विधायक समेत एक पूरा परिवार – माता-पिता और उनके छह बच्चे मारे गए।
  • सभी शव शिफा अस्पताल में लाए गए, जहां भीड़भाड़ और अफरा-तफरी का माहौल रहा।

तेल अल-हवा में एक ही परिवार के 19 सदस्य मारे गए

इजरायली सेना के हमलों में तेल अल-हवा इलाके में एक घर पूरी तरह तबाह हो गया।

  • इस हमले में एक ही परिवार के 19 सदस्य मारे गए।
  • मृतकों में 8 महिलाएं और 6 बच्चे भी शामिल हैं।
  • विस्थापितों के लिए बनाए गए कैंप पर बमबारी में भी एक महिला, पुरुष और उनके दो बच्चों की मौत हुई।

स्वास्थ्य मंत्रालय का आंकड़ा

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को जो रिपोर्ट जारी की, उसके अनुसार:

  • पिछले 24 घंटे में 93 शव अस्पतालों में लाए गए।
  • 278 घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है।
  • इजरायली सेना की ओर से इस हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

कैसे शुरू हुआ इजरायल-हमास का यह युद्ध?

इस भयावह युद्ध की शुरुआत 7 अक्टूबर 2023 को हुई, जब:

  • हमास ने इजरायल पर 5000 से अधिक रॉकेट दागे।
  • सीमा में घुसकर 238 लोगों का अपहरण कर लिया गया।
  • इस हमले में 1200 से ज्यादा इजरायली नागरिकों की मौत हुई।

जवाब में इजरायल ने हमास के खिलाफ बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया, जिसमें:

  • हजारों हमास आतंकियों को मार गिराया गया।
  • इस्माइल हानिया और याह्या सिनवार जैसे शीर्ष हमास नेता भी निशाने पर आए।
  • गाजा में अब तक 58,000 से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं।

क्या हमास का अंत करीब है?

लगातार हो रही बमबारी और हमास के गढ़ों पर इजरायली हमलों के बाद गाजा में हमास की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। लेकिन इस जंग की सबसे बड़ी कीमत आम लोगों को चुकानी पड़ रही है – वे महिलाएं और बच्चे जो इस संघर्ष का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन उसका सबसे बड़ा शिकार बन गए हैं।