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क्या दिल्ली की शकूरबस्ती बनेगी ‘श्रीरामपुरम’? नाम बदलने की राजनीति पर उठा सवाल, जनता बोली- “नाम नहीं, काम चाहिए”

BY: Yoganand Shrivastva

दिल्ली की शकूरबस्ती विधानसभा क्षेत्र को ‘श्रीरामपुरम’ नाम देने की मांग को लेकर राजनीतिक हलकों में नई बहस छिड़ गई है। यह मांग खुद क्षेत्र के बीजेपी विधायक करनैल सिंह द्वारा चलाई जा रही एक अभियान का हिस्सा है। करनैल सिंह का दावा है कि यह परिवर्तन क्षेत्र की जनता की मांग है, लेकिन स्थानीय लोगों की राय इस दावे से काफी हद तक अलग है।

स्थानीय लोग क्या कहते हैं?

न्यू मुल्तान नगर के रिटायर्ड प्रोफेसर सर्वेश कुमार कहते हैं कि, “शकूरबस्ती नाम से किसी को क्या दिक्कत है? यह ऐतिहासिक नाम है, जिसका जुड़ाव इस इलाके की पहचान से है। नाम बदलने से पहचान मिटाने की कोशिश हो रही है।”
मोहम्मद फैजान, जो पिछले 13 साल से शकूरबस्ती में रह रहे हैं, सवाल करते हैं कि, “नाम बदलने से क्या फायदा होगा? हमें तो बुनियादी सुविधाओं की जरूरत है, झुग्गियों को पक्के मकानों में बदलने का वादा आज तक अधूरा है।”

रानी बाग और पश्चिम विहार की राय

रानी बाग में एक सैलून चलाने वाले रजनीश को नाम बदलने से कोई समस्या नहीं है, बल्कि वे इसे सकारात्मक मानते हैं। लेकिन पश्चिम विहार के कुछ निवासी इस बदलाव को “गैर-जरूरी” बताते हैं। उनका मानना है कि नया नाम कन्फ्यूजन ही बढ़ाएगा और इसका प्रशासनिक लाभ नगण्य होगा।

झुग्गियों में रहने वालों की चिंता

रेलवे स्टेशन के पास की झुग्गियों में रहने वाले रमन, जो बचपन से वहीं रह रहे हैं, कहते हैं कि नाम बदलने से दस्तावेज़ों में बदलाव करना पड़ेगा और खर्च आम जनता को उठाना होगा। वे कहते हैं, “नेताओं को नाम बदलने से ज़्यादा यहां की समस्याओं को हल करने पर ध्यान देना चाहिए।”

विधायक का पक्ष

बीजेपी विधायक करनैल सिंह का कहना है कि यह नाम परिवर्तन क्षेत्र की जनता की भावना का सम्मान है और इसका मकसद सांस्कृतिक गौरव को पुनर्जीवित करना है। उनका दावा है कि लोग श्रीरामपुरम नाम से खुद को अधिक जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

राजधानी में नाम बदलने की राजनीति कोई नई बात नहीं

फरवरी 2025 में दिल्ली में बीजेपी सरकार के आने के बाद से नाम बदलने की मांगों में तेजी आई है।

  • नजफगढ़ को ‘नाहरगढ़’
  • मुस्तफाबाद को ‘शिव विहार’
  • मोहम्मदपुर को ‘माधवपुर’
    बनाने की मांगें पहले भी उठ चुकी हैं।

मुस्तफाबाद के विधायक मोहन सिंह बिष्ट कहते हैं कि, “यहां 52% हिंदू और 48% मुस्लिम आबादी है। लोग शिव से प्रेरणा लेते हैं, इसलिए शिव विहार नाम ज्यादा उपयुक्त होगा।” जब उनसे पूछा गया कि क्या नाम से लॉ एंड ऑर्डर या इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थिति सुधरती है, तो उन्होंने माना कि अन्य समस्याएं भी हैं, लेकिन नाम का प्रभाव भी महत्वपूर्ण है।

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