BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: यमन में फंसी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया के मामले में सोमवार को एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, यमन के प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी फांसी की सजा पर अस्थायी रोक लगा दी है। यह सजा बुधवार, 16 जुलाई 2025 को दी जानी थी, लेकिन अब इसे स्थगित कर दिया गया है।
कौन हैं निमिषा प्रिया?
निमिषा प्रिया एक भारतीय नर्स हैं, जो कुछ साल पहले रोजगार के सिलसिले में यमन गई थीं। उन पर स्थानीय नागरिक की हत्या का गंभीर आरोप है। इस मामले में वहां की अदालत ने उन्हें मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई थी।
भारतीय सरकार और सामाजिक संगठनों की पहल
बीते कई महीनों से भारत सरकार, कूटनीतिक स्तर पर यमन के अधिकारियों के साथ संपर्क में थी। इसके साथ ही मानवाधिकार संगठनों, वकीलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया था।
कई पिटीशन, ह्यूमन राइट्स अपील्स और राजनयिक निवेदन के माध्यम से यमन सरकार से फांसी पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया गया था। अब माना जा रहा है कि इन्हीं प्रयासों का असर है कि न्याय प्रक्रिया को फिलहाल विराम मिला है।
फांसी क्यों दी जा रही थी?
निमिषा प्रिया पर आरोप था कि उन्होंने यमन के एक नागरिक की हत्या कर दी थी। यह मामला कई वर्षों से यमन की अदालत में चल रहा था और अंतिम फैसले के तहत उन्हें फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि निमिषा की ओर से यह भी दावा किया गया था कि उन्होंने आत्मरक्षा में यह कदम उठाया था और मामला हत्या नहीं, मजबूरी का था।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यह स्थगन कितने समय के लिए है या यह स्थायी राहत में बदलेगा या नहीं। लेकिन इतना तय है कि भारत सरकार को अब थोड़ा और समय मिल गया है, जिससे वे निमिषा के लिए अंतिम स्तर तक कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई लड़ सकें।
निमिषा की मां ने की थी ‘ब्लड मनी’ की अपील
इससे पहले निमिषा प्रिया की मां ने यमन के कानून के तहत एक विकल्प ‘ब्लड मनी’ (रक्तपुंजी) के जरिए बेटी की फांसी रोकने की अपील की थी। यमन के कानून के अनुसार, यदि मृतक के परिजन क्षमा कर दें और ब्लड मनी स्वीकार कर लें, तो दोषी की फांसी टाली जा सकती है।
अब देखना यह होगा कि इस ब्लड मनी के प्रस्ताव को पीड़ित परिवार स्वीकार करता है या नहीं।
उम्मीद की एक नई किरण
जहां एक ओर पूरा भारत इस खबर का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था, वहीं अब फांसी पर रोक लगने से एक नई उम्मीद जगी है। यह केवल निमिषा प्रिया के लिए ही नहीं, बल्कि विदेशों में कानूनी पचड़ों में फंसे हजारों भारतीयों के लिए भी एक मिसाल बन सकता है।





