14 जुलाई को भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से धरती के लिए रवाना होंगे। यह ऐतिहासिक मिशन भारतीय अंतरिक्ष अभियान में एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि 41 साल बाद कोई भारतीय अंतरिक्ष में गया है।
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14 जुलाई को शाम 4:35 बजे होगी वापसी की शुरुआतमिशन की शुरुआत और चुनौतीपूर्ण यात्राक्या-क्या किया शुभांशु ने अंतरिक्ष में?वैज्ञानिक प्रयोग:प्रधानमंत्री से संवाद:छात्रों और ISRO से जुड़ाव:पृथ्वी की तस्वीरें:भारत का अंतरिक्ष इतिहास: 41 साल बाद फिर चमका ताराएक्सियम-4 मिशन: निजी उड़ान में भारत की भागीदारीइंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है?
14 जुलाई को शाम 4:35 बजे होगी वापसी की शुरुआत
- शुभांशु शुक्ला समेत चार एस्ट्रोनॉट 14 जुलाई को शाम 4:35 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से वापसी के लिए रवाना होंगे।
- करीब 23 घंटे के सफर के बाद 15 जुलाई को दोपहर 3 बजे उनका स्पेसक्राफ्ट समुद्र में स्प्लैशडाउन करेगा।
- यह मिशन स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट से पूरा होगा, जो 263 किलो से ज्यादा का कार्गो लेकर लौटेगा।
मिशन की शुरुआत और चुनौतीपूर्ण यात्रा
- एक्सियम मिशन 4 के तहत शुभांशु 25 जून को कैनेडी स्पेस सेंटर से रवाना हुए थे।
- 26 जून को शाम 4:01 बजे सभी एस्ट्रोनॉट ISS पहुंचे थे।
- खराब मौसम और तकनीकी खामियों के चलते यह मिशन छह बार टाला गया था।
क्या-क्या किया शुभांशु ने अंतरिक्ष में?
वैज्ञानिक प्रयोग:
- कुल 60 प्रयोगों में भाग लिया, जिनमें भारत के 7 प्रमुख प्रयोग शामिल थे।
- मेथी और मूंग के बीजों को अंतरिक्ष में उगाने का प्रयास।
- ‘स्पेस माइक्रोएल्गी’ पर प्रयोग और हड्डियों की सेहत पर रिसर्च।
प्रधानमंत्री से संवाद:
- 28 जून को पीएम नरेंद्र मोदी से लाइव वीडियो कॉल में बातचीत की।
- शुभांशु ने बताया कि अंतरिक्ष से भारत बेहद भव्य नजर आता है।
छात्रों और ISRO से जुड़ाव:
- तिरुवनंतपुरम, बेंगलुरु और लखनऊ के 500 से ज्यादा छात्रों से हैम रेडियो के जरिए संवाद।
- 6 जुलाई को ISRO चेयरमैन डॉ. वी. नारायणन से वैज्ञानिक प्रयोगों पर चर्चा।
पृथ्वी की तस्वीरें:
- ISS के कपोला मॉड्यूल से पृथ्वी की शानदार तस्वीरें लीं।
भारत का अंतरिक्ष इतिहास: 41 साल बाद फिर चमका तारा
- शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष में जाने वाले भारत के दूसरे व्यक्ति बने हैं।
- इससे पहले राकेश शर्मा 1984 में सोवियत स्पेसक्राफ्ट से गए थे।
- इस मिशन का अनुभव गगनयान मिशन में उपयोग होगा, जो 2027 तक लॉन्च होने की उम्मीद है।
एक्सियम-4 मिशन: निजी उड़ान में भारत की भागीदारी
- एक्सियम-4 मिशन में शुभांशु की सीट के लिए भारत ने 548 करोड़ रुपये का भुगतान किया।
- यह प्राइवेट मिशन Axiom Space, NASA और SpaceX की साझेदारी से हुआ।
Axiom पहले भी तीन सफल मिशन भेज चुका है:
- Axiom-1, 17 दिन अप्रैल 2022,
- Axiom-2, 8 दिन, 2 मई 2023
- Axiom-3, 18 दिन, 3 जनवरी 2024
इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन क्या है?
- ISS पृथ्वी की कक्षा में स्थित एक बड़ा अंतरिक्ष यान है।
- इसमें एस्ट्रोनॉट रहते हैं और माइक्रोग्रैविटी में वैज्ञानिक प्रयोग करते हैं।
- यह हर 90 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है।
- 28,000 किमी/घंटे की रफ्तार से यह यात्रा करता है।
- इसे 5 प्रमुख स्पेस एजेंसियों (NASA, Roscosmos, JAXA, ESA, CSA) ने मिलकर बनाया है।
शुभांशु शुक्ला की यह यात्रा न केवल भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में मील का पत्थर है, बल्कि यह युवाओं को विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में करियर की प्रेरणा भी देती है। भारत के लिए यह एक गौरवपूर्ण क्षण है और आने वाले गगनयान मिशन की नींव भी।





