दंतेवाड़ा (छत्तीसगढ़) – 9 जुलाई 2025 को “भारत बंद” के नाम से आयोजित ट्रेड यूनियनों की देशव्यापी हड़ताल का असर छत्तीसगढ़ के लोह नगरी वाले क्षेत्रों—किरंदुल और बचेली—पर भी साफ़ देखा गया। सुबह से ही एटक (ए ट्रेड यूनियन कांग्रेस) और इंटक (इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस) से जुड़े मजदूर और किसान संगठनों के लोग बस स्टैंड व शहीद चौक पर धरने पर बैठे और केंद्र सरकार की श्रम-विरोधी नीतियों का जमकर विरोध किया।
प्रदर्शन के मुख्य मुद्दे
- 17 सूत्री मांगों की पृष्ठभूमि में धरने का आयोजन, जिसमें प्रमुख मांगें शामिल हैं:
- सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक
- चार नए श्रम कानूनों को वापस लेना
- ठेका मजदूरों का न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह किए जाने की मांग
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को नियमित कर्मचारी बनाना
- किसानों को MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) की गारंटी
- मनरेगा मजदूरी ₹800 प्रतिदिन की चाहत
- हजारों मजदूर, पंचायत कार्यकर्ता और किसान संगठित रूप से शामिल थे, जिन्होंने केंद्रीय सरकार की नीतियों को “मजदूर-विरोधी” बताते हुए उनका विरोध किया।
- यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी: “अगर हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो सरकार को इसके भारी परिणाम भुगतने होंगे। अब यह आर-पार की लड़ाई है।”
राष्ट्रीय पृष्ठभूमि
- इस हड़ताल में हिस्सा लेने वाले 25 करोड़ से अधिक मजदूर, बैंकिंग, डाक, परिवहन, खनन और सार्वजनिक क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारी शामिल थे।
- केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने चार श्रम संहिताओं को “गुलामी बनाने वाली” बताया और उनकी वापसी की मांग की ।
- इस हड़ताल से रेलवे, सार्वजनिक बैंक, कोयला व खनन सेक्टर, परिवहन व अन्य बुनियादी सेवाओं में व्यापक रूकावट हुई।
भू-राजनैतिक प्रभाव्स
- स्थानीय ट्रेड यूनियन नेता ने आरोप लगाया कि बडे़ उद्योगपतियों और धनिकों के साथ मिलकर सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को बेचकर आम मजदूरों को गुजरान पर मजबूर कर रही है।
- कृषक संगठन भी आंदोलन में शामिल हैं, जो MSP पर किसानों के हक़ की मांग कर रहे हैं।
- बचेली–किरंदुल के NMDC लोह उत्खनन क्षेत्र में हड़ताल के कारण उत्पादन में 30–40 % तक गिरावट दर्ज की गई, जबकि राजस्व नुकसान दूर से नहीं लगा।





