धमतरी, छत्तीसगढ़ – रायपुर–विशाखापट्टनम कॉरिडोर के अंतर्गत भारतमाला परियोजना की छह‑लेन सड़क निर्माण के लिए ग्राम सिवनीकला और आस-पास के क्षेत्रों से किसानो की जमीन अधिगृहित की गई थी। लेकिन अब ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि मुआवजे में बड़े पैमाने पर घोटाला हुआ है। उन्होंने बताया कि एक ही जमीन को 10–12 टुकड़ों में बांट कर अलग-अलग नामांतरण कर मुआवजे के आंकड़ों में ₹20 करोड़ से अधिक की फर्जी राशि निकाली गई। ग्रामीणों का कहना है कि “सरकारी अधिकारियों, दलालों और भूमाफियाओं की मिलीभगत के बिना यह इतना बड़ा खेल संभव नहीं”।
ग्रामीणों ने इस फर्जीवाड़े को लेकर CBI जांच की मांग की है। यदि स्थानीय प्रशासन में जांच नहीं की जाती, तो वे उग्र आंदोलन पर उतरने की चेतावनी दे रहे हैं। वर्तमान में जिला प्रशासन जांच कर रहा है और आगे की कार्रवाई की बात कह रहा है।
पृष्ठभूमि और विस्तृत जांच:
छत्तीसगढ़ में भारतमाला परियोजना से जुड़ी भूमि अधिग्रहण में अब तक लगभग ₹600 करोड़ का घोटाला सामने आया है, जिसमें SDM, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और पटवारियों के नाम शामिल हैं। EOW और ACB की जांच में कई अधिकारी फरार हैं और संपत्ति कुर्की, गिरफ्तारी वारंट जारी किए जा चुके हैं।
इस घोटाले की व्यापकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि रायपुर एवं दूर्ग डिवीजन में 400 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं और 130 से ज़्यादा संदिग्ध बैंक खाते सामने आए हैं । राज्य सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाकर 11 जिलों में विस्तार किया है।
सरकारी कार्रवाई:
कुछ अधिकारियों को निलंबित किया गया है और कोर्ट ने 29 जुलाई तक निश्चित तारीख तय की है, जिससे सम्बंधित अधिकारी और पटवारियों को उपस्थित होने का आदेश दिया गया है । यदि इसमें लापरवाही बरती गई, तो संपत्ति कुर्की और गिरफ्तारी जैसी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।





