BY: Yoganand Shrivastva
सावन का पावन महीना शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में कांवड़ यात्रा को लेकर सुरक्षा तैयारियों और धार्मिक पहचानों के मुद्दे पर माहौल गरमा गया है। इसी बीच, हिंदू महासभा ने एक नया अभियान शुरू किया है, जिसके तहत कांवड़ मार्ग पर स्थित दुकानों पर “मैं हिंदू हूं” लिखे पोस्टर और भगवा ध्वज लगाए जा रहे हैं।
इस पहल का उद्देश्य— संगठन के मुताबिक— कांवड़ यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालुओं को स्पष्ट संदेश देना है कि वे किस दुकान पर भरोसे से रुक सकते हैं और भोजन ग्रहण कर सकते हैं।
कांवड़ यात्रा के पहले शुरू हुआ ‘पोस्टर कैंपेन’
उत्तर प्रदेश के बरेली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ जैसे जिलों में कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। यहां हर वर्ष लाखों की संख्या में कांवड़िए हरिद्वार, गंगोत्री या अन्य धार्मिक स्थलों से जल भरकर अपने गांव के शिवालयों तक पहुंचते हैं।
हिंदू महासभा के सदस्य इन दिनों दुकानों, ढाबों और ठेलों पर “मैं हिंदू हूं” के पोस्टर चिपका रहे हैं। साथ ही भगवा झंडा और भगवान वराह के चित्र लगाने का आह्वान कर रहे हैं। इस अभियान के ज़रिए यह बताया जा रहा है कि जिन दुकानों पर यह चिन्ह लगे हैं, वे सनातन धर्म के अनुयायियों द्वारा संचालित हैं।
क्या बोले संगठन के नेता यशवीर महाराज?
हिंदू महासभा के वरिष्ठ सदस्य यशवीर महाराज ने बयान में कहा,
“हमारे सनातन धर्म के लोग जिन ढाबों, होटलों, चाय की दुकानों, मिठाई और जूस स्टॉल्स को संचालित करते हैं, उन्हें चाहिए कि वे अपनी पहचान साफ़-साफ़ बताएं। अपनी दुकानों पर भगवान वराह का चित्र लगाएं, भगवा ध्वज लगाएं और मोटे अक्षरों में अपने नाम लिखें। ताकि शिव भक्त यह जान सकें कि वे भोजन कहां करें।”
उन्होंने आगे कहा,
“जहां भगवा झंडा है और भगवान वराह का चित्र है, वहां कोई थूक या अपवित्रता करने वाला नहीं है। वहां सनातन धर्म के लोग ही हैं और वही खाना-पीना सुरक्षित है।”
प्रशासन भी सतर्क, कांवड़ यात्रा के लिए पूरी तैयारी
उत्तर प्रदेश सरकार, खासकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कांवड़ यात्रा को लेकर सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या धार्मिक उन्माद फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कांवड़ यात्रा के रूट पर लगे ढाबों, होटलों, फलों और चाय की दुकानों की निगरानी के लिए स्थानीय प्रशासन, पुलिस, और इंटेलिजेंस यूनिट्स को अलर्ट किया गया है। कई जिलों में CCTV कैमरे, ड्रोन सर्विलांस, और फील्ड ड्यूटी पर तैनात बलों की संख्या बढ़ाई गई है।
पिछले साल से चला आ रहा विवाद
दरअसल, यह मुद्दा कोई नया नहीं है। 2024 में सावन के दौरान भी कांवड़ रूट पर दुकानों के धार्मिक पहचान को लेकर विवाद हुआ था। कई जगहों पर दुकानदारों को अपने नाम और धर्म स्पष्ट रूप से सामने लगाने के लिए कहा गया था ताकि कांवड़िए भ्रमित न हों।
कुछ संगठनों ने यह दावा किया था कि कुछ लोग अपनी असली पहचान छिपाकर दुकान चला रहे हैं, जिससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं। इसको लेकर स्थानीय प्रशासन को भी हस्तक्षेप करना पड़ा था।
कांवड़ यात्रा कब से शुरू होगी?
इस वर्ष सावन मास की शुरुआत 11 जुलाई 2025 से हो रही है और इसी दिन से कांवड़ यात्रा भी शुरू हो जाएगी। यह यात्रा 23 जुलाई तक चलेगी।
इस दौरान अनुमानित 4 करोड़ कांवड़िए हरिद्वार, गंगोत्री, गढ़मुक्तेश्वर जैसे स्थानों से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। पूरे उत्तर भारत में यह धार्मिक आयोजन अत्यंत पवित्र और जनसमर्थन वाला माना जाता है।
अभियान पर उठ रहे सवाल भी
हालांकि इस अभियान की आलोचना भी हो रही है। कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं और धर्मनिरपेक्ष संगठनों ने इसे धार्मिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर इस तरह के पहचान आधारित पोस्टर सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकते हैं।
सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि क्या यह अभियान प्रशासन की अनुमति से किया जा रहा है, या केवल संगठन की ओर से निजी रूप से चलाया जा रहा है।





