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मेरठ में 48 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा: STF ने फर्जी फर्म रैकेट पकड़ा

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मेरठ में 48 करोड़ की जीएसटी चोरी का खुलासा: STF ने फर्जी फर्म रैकेट पकड़ा

उत्तर प्रदेश के मेरठ में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने एक बड़े GST घोटाले का पर्दाफाश किया है। गिरोह के सदस्य लोगों को एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर उनके दस्तावेज लेते थे और उनके नाम से फर्जी फर्म बनाकर करोड़ों रुपये की जीएसटी चोरी करते थे।

STF ने इस रैकेट से जुड़े पांच आरोपियों को कर्नाटक से गिरफ्तार किया है। इनके पास से भारी मात्रा में फर्जी बिल बुक, रबर की मोहरें और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए हैं।


कैसे शुरू हुआ यह घोटाला?

शिकायत से खुली परतें

  • दिनांक: 2 सितंबर 2024
  • शिकायतकर्ता: अश्वनी कुमार, निवासी ग्राम वडसू, मुजफ्फरनगर
  • प्रकरण: अश्वनी ने बताया कि एक महिला ने एयरपोर्ट में नौकरी दिलवाने के नाम पर उनका आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य डॉक्यूमेंट लिए थे।
  • इन डॉक्यूमेंट्स से एक फर्जी फर्म ‘AK ट्रेडर्स’ बनाई गई और उसके माध्यम से 248 करोड़ रुपये के फर्जी इनवॉइस जनरेट किए गए

GST डिपार्टमेंट की जांच

27 अगस्त 2024 को जब GST विभाग की टीम अश्वनी के घर जांच के लिए पहुंची, तब उन्हें पूरे घोटाले की जानकारी मिली। इसके बाद मामला STF को सौंपा गया।


STF की जांच और गिरफ्तारी

ADG ने सौंपी जिम्मेदारी

यह जीएसटी चोरी का अनोखा केस था, जिसमें फर्जी नौकरी के बहाने लोगों से दस्तावेज लेकर फर्म बनाई गई थी।
ADG कानून व्यवस्था ने मेरठ STF को जांच की जिम्मेदारी दी।

कर्नाटक में मिला सुराग

जांच के दौरान STF को आरोपियों की लोकेशन कर्नाटक में मिली।
एक टीम बैंगलोर भेजी गई और वहां वायदराहल्ली थाना क्षेत्र के कैपेगोडा नगर में दबिश देकर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।


कैसे करते थे GST घोटाला?

दो साल से चल रही थी फर्जीवाड़े की स्कीम

  • पकड़े गए आरोपी आपस में रिश्तेदार हैं।
  • इन्होंने राजस्थान से अपने रिश्तेदार लाभूराम और सुरेश को शामिल किया।
  • यह लोग लोगों को नौकरी का लालच देकर आधार, पैन, बिजली बिल जैसे दस्तावेज हासिल करते थे।
  • इन डॉक्यूमेंट्स के सहारे फर्जी सिम और फेक GST अकाउंट बनाए जाते थे।
  • फिर इन फर्मों के जरिए ई-वे बिल जेनरेट कर करोड़ों की GST चोरी होती थी।

बरामद सामान

  • फर्जी बिल बुक
  • नकली रबर स्टांप
  • सैकड़ों दस्तावेज
  • डिजिटल डेटा

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क्या कहती है यह घटना?

यह मामला सिर्फ एक टैक्स चोरी का नहीं, बल्कि डिजिटल धोखाधड़ी और बेरोजगारी का फायदा उठाकर की गई ठगी का उदाहरण है।
इस घोटाले ने यह दिखा दिया है कि कैसे कुछ लोग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर मासूम लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर सकते हैं।

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