विरोध की वजहें
- कन्या शाला को हाई स्कूल में मर्ज करने का निर्णय युक्तिकरण प्रक्रिया के दायरे से बाहर बताया जा रहा है।
- छात्राओं का कहना है कि स्कूल के मर्ज होने के बाद 40–50 लड़कियों ने टीसी निकाल ली है, और ठाकुर दलगंजन हाई स्कूल का परिणाम भी “ठीक नहीं है” जिससे पढ़ाई बाधित होगी।
- प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि “यात्रा-युक्तिकरण” नाम पर यह कदम शिक्षा विभाग की लापरवाही दर्शाता है—जैसे छत्तीसगढ़ के अन्य जिलों में भी कन्या स्कूलों को बिना उचित कारण मर्ज करने की निंदा की गई है।
छात्राओं की प्रतिक्रिया
- कन्या शाला की छात्राओं ने स्कूल के गेट पर ताला जड़ दिया और BEO कार्यालय घेराव किया।
- बोली गई चेतावनी: “मर्ज रद्द न हुआ तो उग्र आंदोलन होगा।”
- बीईओ के आश्वासन के बाद ही छात्राओं ने ताला खोला, लेकिन हड़ताल जारी रहने की चेतावनी दी।
प्रशासन और बीईओ का रुख
- बीईओ ने आश्वासन दिया कि छात्राओं की मांगों पर पुनर्विचार किया जाएगा और मर्ज संबंधी निर्णय की समीक्षा की जाएगी।
- हालांकि, स्पष्ट निर्देश लौटाए जाने पर ही धरना समाप्त हुआ और छात्राओं ने शांतिपूर्वक वापस लौटने का निर्णय लिया।
जनप्रतिनिधियों और मीडिया का समर्थन
- नगर अध्यक्ष, पार्षद और शाला समिति ने इस फैसले को “बेटियों के साथ अन्याय” बताया और सभा बुलाकर विरोध का ऐलान किया grandnews.in+1bhaskar.com+1khabarcgnews.com।
- मीडिया रिपोर्टिंग, जैसे स्वदेश न्यूज़ की किस्म की रिपोर्टिंग, ने प्रशासन को कार्रवाई करने पर मजबूर किया।
मर्जिंग प्रक्रिया—नियमों की अनदेखी?
- छत्तीसगढ़ के युक्तिकरण दिशा‑निर्देशों के अनुसार, मर्जिंग तब ही मान्य है जब स्कूलों की दूरी कम हो, छात्रसंख्या कम हो, और परिसर एक जैसा हो ।
- फिंगेश्वर की कन्या शाला और ठाकुर दलगंजन स्कूल की स्थिति इन मानकों पर खरी नहीं उतरती:
- दोनों स्कूल अलग परिसर में हैं
- कन्या शाला में पर्याप्त संख्या बनी हुई थी
- दूरी भी मानदंड से अधिक है।
अब क्या होगा?
- शिक्षा विभाग की समीक्षा — बीईओ को निर्देश प्राप्त होंगे या नहीं, यह देखा जाना बाकी है।
- मीडिया-सामाजिक दबाव — छात्राएं और ग्रामीण आंदोलन तेज कर सकते हैं।
- नियमों पर लौटना — अगर निर्देशों की अवहेलना हुई है, तो मर्जिंग प्रक्रिया रद्द हो सकती है।





