Trump-Backed 500% Tariff Bill: भारत-चीन की मुश्किलें बढ़ीं, रूस से तेल खरीद बना कारण

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ट्रंप टैरिफ बिल

दुनिया भर में व्यापारिक समीकरण बदलने वाली बड़ी खबर सामने आई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस नए सीनेट बिल का समर्थन कर दिया है, जिसमें रूस से व्यापार जारी रखने वाले देशों पर 500 प्रतिशत आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव है। इस बिल का सीधा असर भारत और चीन जैसे बड़े देशों पर पड़ सकता है, जो अब भी रूस से तेल और अन्य सामान खरीद रहे हैं।

क्या है यह विवादित ट्रंप टैरिफ बिल?

इस बिल को रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेटिक सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया है। बिल का मकसद रूस की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाना है ताकि वह यूक्रेन में चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए बातचीत की टेबल पर आए।

सांसद ग्राहम ने कहा:

“भारत और चीन, पुतिन का 70 प्रतिशत तेल खरीदते हैं। यही रूस की युद्ध मशीन को जिंदा रखे हुए है। हमारा बिल राष्ट्रपति को यह अधिकार देगा कि वह ऐसे देशों से आने वाले उत्पादों पर 500% तक टैरिफ लगा सकें।”

भारत और चीन पर क्यों गिरी गाज?

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। बावजूद इसके, भारत और चीन रूस से सस्ता तेल और अन्य जरूरी सामान खरीदते रहे हैं। अमेरिका का मानना है कि इससे रूस की युद्ध क्षमता बनी रहती है।

इस बिल के लागू होते ही, भारत और चीन जैसे देशों से अमेरिका में आने वाले उत्पादों पर भारी टैक्स लगेगा, जिससे इन देशों की अर्थव्यवस्था और व्यापार पर सीधा असर पड़ सकता है।

ट्रंप प्रशासन का रुख बदला

गौरतलब है कि यह बिल सबसे पहले मार्च 2025 में प्रस्तावित हुआ था, लेकिन उस समय व्हाइट हाउस ने रूस पर प्रतिबंध बढ़ाने में हिचकिचाहट दिखाई थी। ट्रंप प्रशासन रूस के साथ रिश्ते सामान्य करने की कोशिश में था। लेकिन अब स्थिति बदलती दिख रही है।

सांसद ग्राहम ने बताया:

“मैंने ट्रंप के साथ गोल्फ खेलते समय इस बिल पर चर्चा की। उन्होंने कहा- ‘अब समय आ गया है कि इस बिल को आगे बढ़ाया जाए।'”

यूरोप और अन्य देशों को राहत की गुंजाइश

हालांकि, इस बिल में उन देशों के लिए छूट का प्रावधान भी जोड़ा जा सकता है जो यूक्रेन का समर्थन कर रहे हैं। इसका मकसद अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच व्यापार युद्ध टालना है।

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अमेरिका में ही बिल को लेकर मतभेद

हाल ही में आई वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस चाहता है कि बिल की भाषा में कुछ नरमी लाई जाए। बिल में जहां “अनिवार्य” शब्द है, वहां “वैकल्पिक” शब्द जोड़ने की बात हो रही है, ताकि राष्ट्रपति के पास स्थिति के अनुसार निर्णय लेने का विकल्प रहे।

भारत पर क्या होगा असर?

अगर यह बिल लागू होता है तो भारत के लिए आर्थिक और कूटनीतिक स्तर पर मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अमेरिका भारत का एक बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर 500% टैक्स लगने से भारतीय कंपनियों को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है।

वहीं, भारत ने कई बार स्पष्ट किया है कि रूस से तेल खरीदने का उसका फैसला पूरी तरह उसके राष्ट्रीय हितों से जुड़ा है।

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निष्कर्ष: आगे क्या होगा?

यह बिल अगस्त 2025 में पेश किया जाना तय है। अगर यह पारित होता है तो भारत, चीन और रूस के साथ अमेरिका के संबंधों में बड़ा बदलाव आ सकता है। फिलहाल, दुनिया की निगाहें इस बिल और ट्रंप प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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