G7 समिट 2025: क्या मोदी सरकार ने भारत का वैश्विक प्रभाव बढ़ाया?

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G7 समिट 2025 भारत

G7 समिट क्यों है महत्वपूर्ण?

G7, यानी Group of Seven, दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है—अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा। इस ग्रुप के समिट में दुनियाभर की राजनीति, अर्थव्यवस्था, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा होती है।

भारत, G7 का औपचारिक सदस्य नहीं है, लेकिन बीते कुछ वर्षों से इसे बतौर गेस्ट कंट्री लगातार आमंत्रित किया जा रहा है। G7 समिट 2025, जो इस बार इटली के बोरगो एग्नाज़िया में आयोजित हुआ, में भारत की उपस्थिति खास मायने रखती है।


🌐 G7 के सदस्य देश और उनका सामूहिक प्रभाव

देशवैश्विक योगदान
अमेरिकावैश्विक तकनीकी और सैन्य शक्ति
जापानएशिया में प्रमुख आर्थिक ताकत
जर्मनीयूरोप का औद्योगिक इंजन
ब्रिटेनवैश्विक राजनयिक प्रभाव
फ्रांससंयुक्त राष्ट्र में स्थायी सदस्यता
इटलीEU का सक्रिय सदस्य
कनाडाऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों में अग्रणी

इन देशों की GDP, तकनीकी क्षमता और वैश्विक संस्थानों पर प्रभाव इतना अधिक है कि इनकी नीतियां दुनिया की दिशा तय करती हैं।


🇮🇳 भारत की भागीदारी: आमंत्रण प्रतीक या असली शक्ति?

2025 में भारत को एक बार फिर से गेस्ट कंट्री के रूप में बुलाया गया।
इस बार के समिट में पीएम मोदी ने जिन प्रमुख विषयों पर भारत का पक्ष रखा, वे थे:

  • क्लाइमेट चेंज पर वित्तीय सहायता
  • डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)
  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का नैतिक उपयोग
  • ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनना
  • आतंकवाद और सुरक्षा पर सहयोग

भारत की इस भागीदारी को “डायनामिक डिप्लोमेसी” का उदाहरण बताया गया है, जिसमें एक विकासशील देश ने विकसित देशों के साथ आंखों में आंखें डालकर अपनी बात रखी।


🤝 पीएम मोदी की द्विपक्षीय बैठकें: कूटनीतिक व्यस्तता चरम पर

G7 समिट 2025 के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की कई महत्वपूर्ण नेताओं से मुलाकातें हुईं:

  • अमेरिका के राष्ट्रपति: Indo-US tech और डिफेंस सहयोग पर चर्चा
  • जर्मनी की चांसलर: ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स में भागीदारी
  • जापान के प्रधानमंत्री: डिजिटल इंडिया में निवेश
  • इटली की प्रधानमंत्री: मेड इन इंडिया प्रोजेक्ट्स को समर्थन

इन बैठकों में भारत की डिजिटल ताकत, जनसंख्या लाभ, और आर्थिक स्थायित्व को सराहा गया।


📊 मोदी सरकार की विदेश नीति: शक्ति और संतुलन का संगम

मोदी सरकार ने 2014 से लेकर अब तक जो विदेश नीति अपनाई है, उसका मूल मंत्र रहा है:

  • वसुधैव कुटुम्बकम – समूचा विश्व एक परिवार
  • Act East + Think West नीति
  • Global South की आवाज़ बनना
  • स्ट्रैटेजिक ऑटोनॉमी – अमेरिका, रूस, और चीन के बीच संतुलन बनाए रखना

G7 समिट 2025 में इन नीतियों की झलक देखने को मिली। खासकर जब पीएम मोदी ने कहा, “विकासशील देशों को भी समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।”


📌 भारत ने किन मुद्दों पर ज़ोर दिया?

1. क्लाइमेट फंडिंग में न्यायपूर्ण हिस्सेदारी

भारत ने मांग रखी कि G7 देश विकासशील देशों को जलवायु परिवर्तन से लड़ने के लिए उचित फंडिंग दें।

2. डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक मान्यता

Aadhaar, UPI और CoWIN जैसे सिस्टम्स को वैश्विक मॉडल बनाने का प्रस्ताव।

3. ग्लोबल साउथ की आवाज़ को महत्व देना

अफ्रीका, एशिया और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों के हितों की बात।


📰 विश्लेषण: क्या मिला भारत को?

पहलूप्रभाव
वैश्विक पहचानभारत को निर्णायक साझेदार माना गया
आर्थिक सहयोगकई निवेश प्रस्ताव मिले
रणनीतिक भागीदारीक्वाड और I2U2 जैसे मंचों को मजबूती
मीडिया कवरेजअंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की सकारात्मक छवि

🗣️ विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

  • C. राजा मोहन (विदेश नीति विशेषज्ञ): “भारत की भूमिका अब केवल भागीदार की नहीं, बल्कि निर्णायक की होती जा रही है।”
  • शशि थरूर (राजनीतिक विश्लेषक): “भारत को अब G7 की स्थायी सदस्यता का दावा करना चाहिए।”

❓ FAQs (प्रश्नोत्तरी)

1. G7 समिट 2025 कब और कहां हुआ?
→ यह समिट 13-15 जून 2025 को इटली के बोरगो एग्नाज़िया में हुआ।

2. क्या भारत G7 का सदस्य है?
→ नहीं, भारत G7 का सदस्य नहीं है, लेकिन गेस्ट कंट्री के तौर पर आमंत्रित किया जाता है।

3. भारत ने समिट में कौन-कौन से मुद्दे उठाए?
→ क्लाइमेट फंडिंग, डिजिटल इनफ्रास्ट्रक्चर, ग्लोबल साउथ, और आतंकवाद पर।

4. क्या भारत को G7 की स्थायी सदस्यता मिल सकती है?
→ यह भविष्य की रणनीति और वैश्विक समर्थन पर निर्भर करेगा, लेकिन भारत की भूमिका निश्चित रूप से बढ़ रही है।


🧾 निष्कर्ष: G7 में भारत की मज़बूत होती उपस्थिति

G7 समिट 2025 में भारत की भागीदारी सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं थी, बल्कि यह एक सक्रिय, प्रभावशाली और भरोसेमंद देश की उपस्थिति थी। प्रधानमंत्री मोदी की नेतृत्व में भारत ने न केवल अपनी बात रखी, बल्कि ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज़ बनकर उभरा।

अब सवाल यह है: क्या भारत अगली बार सिर्फ ‘गेस्ट’ नहीं, बल्कि ‘G8’ का सदस्य बन सकता है?


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