,

जब विलेन बना एक्टर, तो निभाया ऐसा किरदार कि 50 दिन तक नहीं नहाया – मुकेश तिवारी की ‘जगीरा’ वाली कहानी

BY: Yoganand Shrivastava

साल 1998 में रिलीज़ हुई राजकुमार संतोषी की फिल्म चाइना गेट को भले ही बॉक्स ऑफिस पर ज्यादा सफलता न मिली हो, लेकिन इस फिल्म का विलेन ऐसा था, जिसने दर्शकों के दिलो-दिमाग पर गहरी छाप छोड़ी। अभिनेता मुकेश तिवारी ने फिल्म में ‘जगीरा’ नामक खूंखार डाकू का किरदार निभाया था, और उनकी यह भूमिका आज भी चर्चाओं में रहती है।

पहली ही फिल्म में धमाकेदार एंट्री

‘चाइना गेट’ मुकेश तिवारी के करियर की पहली फिल्म थी, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय से इतने बड़े कलाकारों के बीच भी खुद को साबित कर दिया। फिल्म में ओम पुरी, नसीरुद्दीन शाह, अमरीश पुरी और कुलभूषण खरबंदा जैसे नामी सितारे थे, फिर भी जगीरा का किरदार सबसे ज्यादा यादगार बन गया।

किरदार के लिए खुद को किया बुरी हालत में तब्दील

मुकेश तिवारी ने अपने किरदार को असली दिखाने के लिए किसी भी हद तक जाने का फैसला किया। उन्होंने पूरे 50 दिनों तक नहाना छोड़ दिया ताकि उनका लुक असली डाकू जैसा लगे – गंदा, खतरनाक और डरावना। उनके शरीर से बदबू आने लगी थी, जिससे बचने के लिए वे लगातार परफ्यूम का इस्तेमाल करते थे। उनके पास जब चील और कौवे मंडराने लगे, तो टीम को समझ आया कि वह किरदार में कितने गहरे उतर चुके हैं।

शूटिंग में लगी चोट, फिर भी नहीं रुके

एक दिन जब वह घोड़े पर सवार थे, तो घोड़ा बेकाबू हो गया और मुकेश तिवारी गिरकर घायल हो गए। लेकिन इस चोट के बाद भी उन्होंने शूटिंग रोकने की बजाय जारी रखी। उनका फेमस डायलॉग “मेरे मन को भाया, मैं कुत्ता काट के खाया” आज भी सोशल मीडिया पर वायरल होता रहता है और मीम्स का हिस्सा बना रहता है।

जगीरा के बाद दो साल तक नहीं मिला काम

‘चाइना गेट’ में अभिनय की खूब तारीफें पाने के बावजूद, मुकेश तिवारी को इसके बाद दो साल तक कोई बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिला। मगर जब रोहित शेट्टी की गोलमाल सीरीज में उन्हें वसूली भाई का किरदार मिला, तो एक बार फिर वे दर्शकों के चहेते बन गए। इस भूमिका ने उन्हें न केवल कॉमिक रोल में पहचान दिलाई, बल्कि एक नई फैन फॉलोइंग भी दे दी। आज भी लोग उन्हें ‘वसूली भाई’ कहकर याद करते हैं।