BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: कर्नल सोफिया कुरैशी पर की गई अभद्र टिप्पणी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री विजय शाह को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते उन्हें अपने शब्दों के चयन में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों वाली विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने के निर्देश दिए हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने विजय शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह की दलीलें सुनीं। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा,
“कभी-कभी लोग झूठी माफी मांगते हैं और घड़ियाली आंसू बहाते हैं। अब यह देखना है कि आपकी माफी किस श्रेणी में आती है।”
इसके साथ ही अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि विजय शाह एक सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति हैं, उन्हें अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए।
जांच के लिए एसआईटी गठन के निर्देश
कोर्ट ने मध्य प्रदेश के डीजीपी को आदेश दिया है कि मंगलवार सुबह 10 बजे तक एक विशेष जांच टीम (SIT) गठित की जाए, जिसमें निम्नलिखित निर्देश शामिल हैं:
- टीम में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल होंगे
- इनमें एक महिला अधिकारी भी रहेंगी
- एसआईटी का नेतृत्व आईजी रैंक के अधिकारी करेंगे
- सभी अधिकारी राज्य के बाहर के होने चाहिए
- पहली स्टेटस रिपोर्ट 28 मई 2025 तक सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाए
फिलहाल गिरफ्तारी पर रोक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि विजय शाह की गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक रहेगी, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी निगरानी की जाएगी। कोर्ट ने टिप्पणी की:
“यह एक लिटमस टेस्ट है। हम चाहते हैं कि राज्य सरकार ईमानदारी से जांच कराए और रिपोर्ट हमारे समक्ष पेश करे।”
“आपके शब्दों से देश शर्मिंदा” – सुप्रीम कोर्ट
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह के भाषण की तीखी आलोचना करते हुए कहा:
“आप मंच पर खड़े होकर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, वह बेहद आपत्तिजनक थी। सेना से जुड़े मामलों में हमें बेहद जिम्मेदार होना चाहिए। पूरा देश इस व्यवहार से शर्मिंदा है।”
साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय ने अभी तक विजय शाह को दोषी करार नहीं दिया है और न ही सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक कोई अंतिम आदेश दिया है। यह अवसर मंत्री के आत्मनिरीक्षण और सुधार के लिए है।




