BY: Yoganand Shrivastva
मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक बयान ने हलचल मचा दी है। बीजेपी के वरिष्ठ मंत्री विजय शाह ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की नायिका कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादास्पद टिप्पणी कर दी, जिससे न सिर्फ पार्टी को बैकफुट पर आना पड़ा बल्कि उनके इस्तीफे की मांग भी तेज़ हो गई है। यह मामला राज्य में आदिवासी राजनीति, महिला सम्मान और राजनीतिक जिम्मेदारी जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दों को छूता है।
क्या है पूरा मामला?
- कर्नल सोफिया कुरैशी ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की अहम शख्सियत रही हैं, जिन्होंने आतंक के खिलाफ बड़ी कार्रवाई में हिस्सा लिया।
- एक सरकारी कार्यक्रम में विजय शाह ने उन्हें ‘आतंकी की बहन’ कह दिया।
- हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए एफआईआर के आदेश दिए और सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की।
- बीजेपी के भीतर और बाहर विरोध बढ़ने पर शाह ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी।
बीजेपी की डैमेज कंट्रोल रणनीति
- मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष वीडी शर्मा ने सोफिया कुरैशी के घर जाकर उन्हें ‘देश की बेटी’ बताया।
- विजय शाह ने कई बार माफी मांगकर खुद को सुधारने की कोशिश की।
- पार्टी ने अब तक कोई कठोर कार्रवाई नहीं की है, लेकिन जांच की बात सामने आ रही है।
विजय शाह: मजबूरी या जरूरी?
कुंवर विजय शाह सिर्फ विवादों के लिए ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की बीजेपी में एक मजबूत आदिवासी चेहरे के रूप में जाने जाते हैं।
राजनीतिक प्रोफाइल:
- हरसूद से लगातार 8 बार विधायक।
- 5 बार कैबिनेट मंत्री।
- उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव की सरकारों में मंत्री रहे।
- आदिवासी समुदाय में गहरी पकड़।
मुख्य कारण जिनसे बीजेपी अब तक कार्रवाई से बचती रही:
- मध्य प्रदेश की 47 आदिवासी सीटों पर असर।
- 2018 में बीजेपी सिर्फ 16 सीटें जीत पाई थी, 2023 में यह बढ़कर 24 हुई।
- आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिए विजय शाह जैसे नेताओं की भूमिका अहम।
विवादों से पुराना नाता
विजय शाह का विवादों से पुराना रिश्ता रहा है:
- 2013 में सीएम शिवराज की पत्नी साधना सिंह पर टिप्पणी।
- “इनको दो-दो टीशर्ट दो, मुझे नहीं पता ये नीचे क्या पहनती हैं” – एक सरकारी कार्यक्रम में लड़कियों पर टिप्पणी।
- विद्या बालन की फिल्म ‘शेरनी’ की शूटिंग में अड़ंगा।
- विधानसभा परिसर में माउजर लेकर पहुंचना।
- ट्रांसजेंडर और अल्पसंख्यकों पर विवादित बयान।
- राहुल गांधी की शादी पर निजी टिप्पणी।
जनता की नजर में और आगे क्या?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी इस बार सिर्फ माफी से संतुष्ट रहेगी या कोई सख्त कदम उठाएगी? मध्य प्रदेश जैसे राज्य में, जहां आदिवासी राजनीति का बड़ा प्रभाव है, पार्टी को संतुलन साधना आसान नहीं होगा।
अगर बीजेपी कड़े कदम नहीं उठाती, तो यह महिला सुरक्षा और सैनिक सम्मान जैसे मुद्दों पर उसकी नीयत पर सवाल खड़े कर सकता है। दूसरी ओर, यदि वह विजय शाह को बाहर का रास्ता दिखाती है, तो आदिवासी वोट बैंक का असंतोष पार्टी के लिए भारी पड़ सकता है।
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विजय शाह की टिप्पणी ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि राजनीति में ज़ुबान का संतुलन कितना अहम है। एक ओर देश के लिए लड़ने वाली महिला अधिकारी का अपमान, दूसरी ओर आदिवासी राजनीति का समीकरण—बीजेपी को अब तय करना होगा कि विजय शाह मजबूरी हैं या फिर कोई विकल्प ज़रूरी है।





