BY- ISA AHMAD
कांकेर जिला के मुसुरपुट्टा गांव में एक अनोखी शादी देखने को मिली, जहां आधुनिकता की चकाचौंध से दूर, लोगों ने पुरानी परंपराओं को अपनाने का संदेश दिया। बढ़ती महंगाई और शादियों में हो रहे फिजूलखर्ची के बीच टकेंद्र कश्यप नामक दूल्हे ने अपनी शादी को सादगी और परंपरा से जोड़ा, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
टकेंद्र कश्यप, जो पेशे से बस चालक हैं और महिंद्रा ट्रेवल्स में कार्यरत हैं, उन्होंने अपनी शादी में बैलगाड़ी को परिवहन का माध्यम चुना। दूल्हा पांच बैलगाड़ियों में करीब 50 बारातियों के साथ निकला और ग्राम खजरावन, जो मुसुरपुट्टा से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित है, वहां अपनी दुल्हन सावित्री सुरोजिया को लेने गया।
टकेंद्र ने बताया कि बचपन से बैलगाड़ी में बारात ले जाने का सपना था, और उनके दादा जी की भी यही इच्छा थी कि परिवार की बारात बैलगाड़ी में निकले। इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने यह अनूठा निर्णय लिया। उनका कहना है कि शादी को दिखावे का जरिया नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों को दर्शाने का अवसर बनाना चाहिए।
टकेंद्र ने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में बाराती ले जाने से वधु पक्ष पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ता है, इसलिए उन्होंने केवल 50 बारातियों के साथ सादगीपूर्ण ढंग से बारात निकाली।
इस अनोखी पहल से क्षेत्र में खुशी और कौतूहल का माहौल बना रहा। गांव के लोगों ने इस शादी को एक सकारात्मक संदेश बताते हुए कहा कि ऐसी पहल समाज में फिजूलखर्ची को रोकने में मददगार हो सकती है।
टकेंद्र की यह सादगीभरी परंपरागत शादी न सिर्फ चर्चा का विषय बनी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृति और मूल्य आधारित जीवनशैली की प्रेरणा भी देती है।
रिपोर्टर: चन्द्रभान साहू





