BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली – भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर बढ़ते तनाव के बीच, भारतीय नौसेना अपनी समुद्री ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रूस में निर्मित एक अत्याधुनिक युद्धपोत, आईएनएस तमाल, जल्द ही भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल किया जाएगा।
रूस में बनकर तैयार हुआ INS Tamal
आईएनएस तमाल को रूस के प्रसिद्ध यंतर शिपयार्ड में तैयार किया गया है। यह 3,900 टन वजनी स्टील्थ फ्रिगेट अगले कुछ हफ्तों में रूस के लेनिनग्राद पोर्ट पर आधिकारिक रूप से भारत को सौंपा जाएगा। यह पोत भारत-रूस रक्षा सहयोग के तहत बनाए जा रहे चार युद्धपोतों में से दूसरा है। इससे पहले INS तुशील को दिसंबर 2024 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा रूस दौरे पर शामिल किया जा चुका है।
आधुनिक हथियारों की भरमार
INS तमाल को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली, पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर से लैस किया गया है। यह पोत जल, थल, वायु और पनडुब्बी – चारों डोमेन में युद्ध संचालन में सक्षम है। इसे ब्लू वॉटर ऑपरेशन की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
भारत-रूस रक्षा सौदे का हिस्सा
यह युद्धपोत 2016 में हुए भारत-रूस रक्षा समझौते के तहत खरीदा जा रहा है। समझौते के अनुसार, भारत चार क्रिवाक-III श्रेणी के फ्रिगेट्स का अधिग्रहण कर रहा है। इसमें से पहले दो – INS तुशील और INS तमाल – रूस से सीधे खरीदे जा रहे हैं, जिनकी कुल लागत लगभग ₹8,000 करोड़ बताई जा रही है। वहीं, शेष दो फ्रिगेट्स – त्रिपुत और तवस्या – भारत के गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में निर्माणाधीन हैं और इनकी लागत करीब ₹13,000 करोड़ आंकी गई है।
INS तमाल की प्रमुख क्षमताएं
- अधिकतम गति: 30 नॉट्स (लगभग 55 किमी/घंटा)
- ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली से लैस
- सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें
- पनडुब्बी रोधी हथियार प्रणाली
- लंबी दूरी तक गश्त और सुरक्षा क्षमता
INS तमाल का नाम ‘तमाल’ संस्कृत शब्द से लिया गया है, जिसका अर्थ है तलवार – जो इस पोत की आक्रामक और रणनीतिक ताकत को दर्शाता है। यह पोत अपने सभी समुद्री परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर चुका है और अंतिम परीक्षणों के दौर से गुजर रहा है, जिसके बाद इसे भारतीय नौसेना में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाएगा।





