BY: Yoganand Shrivastva
नई दिल्ली: हर बार जब भारत में आतंकी हमला होता है और उसकी परछाईं पाकिस्तान तक जाती है, तो भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में तात्कालिक कड़वाहट देखने को मिलती है। इसके बाद अक्सर देखा गया है कि पाकिस्तान सबसे पहले अपने हवाई क्षेत्र को भारत के लिए बंद करने की धमकी देता है या अस्थायी रूप से रोक लगाता है। सवाल ये उठता है कि आखिर ऐसा क्यों? क्या पाकिस्तान को भारत से एयर स्ट्राइक का डर है या इसके पीछे कोई और रणनीति छुपी होती है?
एयर स्पेस पर नियंत्रण: डर या रणनीति?
विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान के इस कदम के पीछे दो बड़ी वजहें होती हैं —
- सुरक्षा का डर:
2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान की एयर डिफेंस को लेकर चिंता और बढ़ गई है। भारतीय वायुसेना की गुप्त रणनीति और तेज़ कार्रवाई ने पाकिस्तान की सुरक्षा तैयारियों की पोल खोल दी थी। ऐसे में जब भी तनाव बढ़ता है, पाकिस्तान को डर होता है कि भारत दोबारा सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक कर सकता है। - राजनीतिक दबाव का प्रतीकात्मक हथियार:
हवाई क्षेत्र बंद करने की चेतावनी, पाकिस्तान के लिए एक डिप्लोमैटिक दबाव का माध्यम भी है। यह वैश्विक मंचों पर दिखाने का प्रयास होता है कि ‘हम भी जवाबी कदम उठा रहे हैं’। हालाँकि इसका असर केवल भारत ही नहीं, खाड़ी देशों और पश्चिमी देशों की फ्लाइट्स पर भी पड़ता है, जिससे पाकिस्तान खुद भी आर्थिक नुकसान उठाता है।
2019 की मिसाल: 6 महीने रहा था एयरस्पेस बंद
फरवरी 2019 में पुलवामा आतंकी हमले के बाद जब भारत ने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की, तब पाकिस्तान ने अपने हवाई क्षेत्र को करीब 6 महीने तक भारत के विमानों के लिए बंद रखा था। इससे पाकिस्तान को लगभग 50 करोड़ रुपये से अधिक का एविएशन रेवेन्यू लॉस हुआ था, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी लंबे रूट लेने पड़े थे।
आतंरिक अस्थिरता और सैन्य तैयारी
पाकिस्तान का एयरस्पेस बंद करने का एक और कारण होता है – घरेलू सैन्य आधारों को सक्रिय करना और सुरक्षा घेरा बढ़ाना। इससे उसे भारत की किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई से निपटने के लिए समय मिल जाता है।
क्या भारत को इससे फर्क पड़ता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में भारत के पास पर्याप्त तकनीकी विकल्प और एयर रूट्स मौजूद हैं, जिससे पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र की जरूरत कम पड़ती है। भारत ने 2019 के बाद से ही अपने सैन्य और नागरिक उड़ानों के लिए वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय रूट्स विकसित कर लिए हैं।
डर और दबाव का एक साथ खेल
पाकिस्तान का हवाई क्षेत्र बंद करना एक तरफ जहां भारत से डर को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ यह एक राजनीतिक बयान भी होता है — “हम चुप नहीं बैठेंगे।” लेकिन यह रणनीति खुद पाकिस्तान के लिए ही महंगी और अव्यवहारिक साबित होती है।
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