भोपाल (मध्य प्रदेश): सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने कहा कि यदि लेडी जस्टिस की मूर्ति के हाथ में संविधान के साथ गीता, वेद और पुराण भी रखे जाएँ, तो यह सच्चे अर्थों में न्याय का ‘भारतीयकरण’ होगा।
न्यायमूर्ति मित्तल शनिवार को नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी (NLIU) में आयोजित पहले NLIU-SBA लॉ कॉन्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट ने न्याय प्रणाली को भारतीय स्वरूप दिया है।
न्याय प्रणाली में बदलाव के प्रयास
न्यायमूर्ति मित्तल ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने दो महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- सभी निर्णयों का 13 भाषाओं में अनुवाद
- लेडी जस्टिस की मूर्ति का नया स्वरूप
उन्होंने कहा, “लेडी जस्टिस की मूर्ति को बदल दिया गया है। अब भारतीय सुप्रीम कोर्ट में लेडी जस्टिस की मूर्ति साड़ी पहने हुए है, जिसके हाथ में तलवार के बजाय संविधान है और उसकी आँखों पर पट्टी नहीं है।”
ये परिवर्तन औपनिवेशिक प्रभाव से दूर हटकर भारतीय न्याय प्रणाली को एक नया प्रतीकात्मक रूप देते हैं।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की भूमिका
न्यायमूर्ति मित्तल ने बताया कि AI की मदद से सभी निर्णयों का 13 भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है, जिससे आम लोगों को न्यायिक प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी।
कानून सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJ) सुरेश कैत ने कहा कि कानून सिर्फ क़ानूनी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह न्याय, संवेदना और तर्क पर आधारित है। उन्होंने कहा, “कानून की पढ़ाई सिर्फ कक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि चर्चाओं, सहयोग और रचनात्मकता से समृद्ध होनी चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब छात्र ऐसे मंचों का आयोजन करते हैं, जहाँ विचार-विमर्श और आलोचनात्मक चर्चाएँ होती हैं, तो इसका मतलब है कि देश का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।
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