अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि वह जल्द ही फार्मास्युटिकल उद्योग पर आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने की घोषणा करेंगे, हालांकि उन्होंने इसके समय या दरों के बारे में कोई विवरण नहीं दिया।
प्रमुख बिंदु:
- ट्रम्प ने यह बात एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कही।
- उन्होंने यह भी कहा कि वह अन्य देशों के साथ समझौतों पर बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन यह 2 अप्रैल को पारस्परिक शुल्क (रिसिप्रोकल टैरिफ) लागू होने के बाद ही होगा।
- ब्रिटेन जैसे देशों ने अमेरिका से संभावित समझौतों पर चर्चा करने के लिए संपर्क किया है।
- ट्रम्प ने कहा, “वे समझौता करना चाहते हैं। अगर हमें समझौते में कुछ मिलता है, तो यह संभव है।”
- हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि 2 अप्रैल से पहले कोई समझौता नहीं होगा।

ऑटो उद्योग पर पहले ही लगा चुके हैं 25% शुल्क
इससे पहले, ट्रम्प ने ऑटोमोबाइल आयात पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना है। व्हाइट हाउस का अनुमान है कि इससे $100 बिलियन सालाना की आय होगी, लेकिन इससे ग्लोबल सप्लाई चेन पर निर्भर कार निर्माताओं पर दबाव बढ़ सकता है।
ट्रम्प ने इस निर्णय को “स्थायी” बताया और यूरोपीय संघ (ईयू) तथा कनाडा को चेतावनी दी कि अगर वे अमेरिका के खिलाफ मिलकर काम करते हैं, तो उन पर और भी अधिक शुल्क लगाए जाएंगे।
अन्य महत्वपूर्ण जानकारी:
- फार्मा शुल्क का असर दवा की कीमतों पर पड़ सकता है।
- भारतीय फार्मा कंपनियों को भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका भारतीय दवाओं का एक बड़ा बाजार है।
- ट्रम्प की ट्रेड पॉलिसी का उद्देश्य अमेरिकी उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है।
आगे क्या होगा?
2 अप्रैल को रिसिप्रोकल टैरिफ लागू होने के बाद वैश्विक व्यापार पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।





