जबलपुर, 27 मार्च 2025
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अब किसी भी लॉ कॉलेज या विश्वविद्यालय द्वारा बिना मान्यता के छात्रों को एडमिशन दिए जाने पर संचालकों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत और जस्टिस विवेक जैन की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए कहा कि नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही सभी संस्थानों को अपनी मान्यता प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

हाईकोर्ट के प्रमुख निर्देश:
- सभी लॉ कॉलेजों को 31 दिसंबर तक बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को रिन्युअल फीस जमा करानी होगी।
- BCI को फरवरी तक मान्यता प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
- यदि किसी संस्थान की मान्यता नवीनीकृत नहीं होती है, तो उसे अपनी वेबसाइट पर स्पष्ट रूप से यह जानकारी देनी होगी, ताकि छात्र भ्रमित न हों।
- बिना मान्यता वाले संस्थानों में एडमिशन देने पर संचालकों को जेल हो सकती है।
छात्रों की याचिका पर सुनवाई
यह मामला जबलपुर के कुछ लॉ छात्रों की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने सेंट्रल इंडिया लॉ इंस्टीट्यूट, जबलपुर से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की, लेकिन MP स्टेट बार काउंसिल ने उनका पंजीयन करने से इनकार कर दिया, क्योंकि संस्थान की BCI मान्यता समाप्त हो चुकी थी। बाद में पता चला कि संस्थान ने BCI को रिन्युअल फीस जमा ही नहीं कराई थी।
नर्सिंग कॉलेजों में फर्जीवाड़े पर रोक
हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजों में फर्जी एडमिशन से जुड़े एक अन्य मामले में भी अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने 2022-23 बैच के छात्रों को आगामी परीक्षा में बैठने की अनुमति दी, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट किया कि बिना कोर्ट की अनुमति के परीक्षा परिणाम घोषित नहीं किए जाएंगे।
क्या कहा कोर्ट ने?
- “छात्रों का एक साल बर्बाद नहीं होना चाहिए।”
- “परीक्षा तिथि बढ़ाई जा सकती है, लेकिन 15 दिन से अधिक विलंब नहीं होना चाहिए।”
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन ने उठाई थी आवाज
इस मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने जनहित याचिका दायर कर नर्सिंग कॉलेजों में हो रहे फर्जीवाड़े को उजागर किया था।
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