नई दिल्ली: राज्यसभा में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले आर्थिक लाभ के लिए निर्धारित बजट की बहुत कम रियायत का आरोप लगाया। सोनिया गांधी ने यह भी मांग की कि इस योजना के तहत महिलाओं को पूरा लाभ दिया जाए, ताकि मातृत्व संबंधी जरूरतों को पूरी तरह से पूरा किया जा सके।
मुख्य आरोप:
राज्यसभा में अपने बयान में सोनिया गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून 2013 के तहत भी मातृत्व लाभ प्रदान करने का प्रावधान था, परंतु वर्तमान में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत केवल 5000 रुपये का ही प्रावधान रखा गया है। उन्होंने बताया कि सितंबर 2013 में मनमोहन सिंह के नेतृत्व में पारित इस कानून में अनौपचारिक क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को 6000 रुपये प्रदान किए जाने की बात तय की गई थी।
बजट आवंटन की कमी पर सवाल:
सोनिया गांधी ने कहा कि 2022-23 में किए गए विश्लेषण के अनुसार, योजना के तहत पहले बच्चे के जन्म पर लाभ प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत 68 था, लेकिन अगले वर्ष यह मात्र 12 प्रतिशत रह गया। उन्होंने सरकार से इस गिरावट का कारण पूछते हुए कहा कि मातृत्व लाभ की पूर्ण रूपरेखा के लिए वार्षिक 12,000 करोड़ रुपये का बजट आवश्यक है।
बजट दस्तावेजों में अस्पष्टता:
सोनिया गांधी ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि बजट दस्तावेजों में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का विशेष उल्लेख नहीं किया गया है। महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत ‘सामर्थ्य’ नामक एक कार्यक्रम के लिए 2025-26 में 2521 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि मातृ वंदना योजना के लिए अपेक्षित बजट काफी कम रखा गया है।
सोनिया गांधी का कहना है कि यदि गर्भवती महिलाओं को उनके हक का पूरा आर्थिक लाभ नहीं दिया जाता, तो यह महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ एक स्पष्ट अपमान होगा। उन्होंने सरकार से अपील की है कि मातृत्व लाभ के लिए आवंटित बजट में तत्काल वृद्धि की जाए ताकि महिला कल्याण सुनिश्चित किया जा सके।
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