,

संविधान की वो धारा जो न्यायाधीशों को पद से हटा सकती है! जानें पूरी प्रक्रिया

- Advertisement -
Ad imageAd image
संविधान की वो धारा जो न्यायाधीशों को पद से हटा सकती है! जानें पूरी प्रक्रिया

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया

भारत में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति और हटाने की प्रक्रिया संविधान द्वारा निर्धारित की गई है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने का प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 217 और अनुच्छेद 124 (4) के अंतर्गत आता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को कैसे हटाया जा सकता है।

हटाने के कारण

संविधान के अनुसार, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को निम्नलिखित कारणों से हटाया जा सकता है:

  1. दुर्व्यवहार (Misbehaviour): यदि न्यायाधीश के आचरण में कोई गंभीर अनैतिकता पाई जाती है।
  2. अक्षमता (Incapacity): यदि न्यायाधीश मानसिक या शारीरिक रूप से अपने कर्तव्यों का पालन करने में असमर्थ हो।

हटाने की प्रक्रिया

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया जटिल और सख्त होती है। इसके लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना पड़ता है:

  1. आवेदन पत्र (Notice of Motion):
    • संसद के किसी भी सदन में हटाने के लिए एक नोटिस दिया जा सकता है।
    • यह नोटिस लोकसभा के कम से कम 100 सदस्य या राज्यसभा के कम से कम 50 सदस्य द्वारा हस्ताक्षरित होना चाहिए।
  2. जांच समिति का गठन (Formation of Inquiry Committee):
    • नोटिस प्राप्त होने के बाद, सभापति (राज्यसभा में) या अध्यक्ष (लोकसभा में) एक तीन-सदस्यीय समिति का गठन करते हैं। यह समिति निम्नलिखित सदस्यों से मिलकर बनती है:
      • एक सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश।
      • एक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश।
      • एक प्रतिष्ठित न्यायविद।
  3. जांच प्रक्रिया (Investigation Process):
    • समिति आरोपों की जांच करती है और सबूतों का मूल्यांकन करती है।
    • यदि समिति आरोपों को सही पाती है, तो वह एक रिपोर्ट तैयार करती है और उसे संबंधित सदन को सौंप देती है।
  4. मतदान (Voting):
    • अगर समिति की रिपोर्ट में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उस रिपोर्ट को संसद के दोनों सदनों में पारित किया जाना चाहिए।
    • यह प्रस्ताव संसद के प्रत्येक सदन में उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत द्वारा पारित होना चाहिए।
  5. राष्ट्रपति की स्वीकृति (President’s Approval):
    • संसद द्वारा प्रस्ताव पारित होने के बाद, राष्ट्रपति की स्वीकृति ली जाती है।
    • राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद न्यायाधीश को हटा दिया जाता है।

अब तक के उदाहरण

भारत के इतिहास में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने का मामला बहुत ही दुर्लभ है। इसकी प्रक्रिया को इतना कठिन और पारदर्शी बनाया गया है कि केवल गंभीर मामलों में ही न्यायाधीश को हटाया जा सके।

निष्कर्ष

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया संविधान द्वारा संरक्षित की गई है ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता बनी रहे। यह प्रक्रिया यह सुनिश्चित करती है कि किसी भी न्यायाधीश को बिना किसी ठोस कारण के पद से नहीं हटाया जा सकता।

Abhyudaya 2026 : फेक नहीं नेक न्यूज की आदत डालें पत्रकार, सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताई मीडिया की भूमिका

Abhyudaya 2026 : भोपाल में माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय

Mohan Yadav Abhyudaya: ‘फेक नहीं, नेक न्यूज की आदत डालें’, CM मोहन यादव ने अभ्युदय-2026 का किया शुभारंभ

Mohan Yadav Abhyudaya माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में मंगलवार

Kurukshetra UGC Rollback Protest: स्वर्ण समाज की प्रेस वार्ता, कल कुरुक्षेत्र पहुंचेगी यूजीसी रोलबैक पदयात्रा

रिपोर्टर: गुरदीप सिंह गुर्जाल Kurukshetra UGC Rollback Protest : कुरुक्षेत्र। UGC फ़ैसला

Mahendragarh Police Encounter: मोस्ट वांटेड बदमाश से पुलिस की मुठभेड़, पैर में गोली लगने के बाद गिरफ्तार

रिपोर्ट: गुलशन कुमार Mahendragarh Police Encounter : नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले में मंगलवार