मुख्य बिंदु:
- आरबीआई ने इंडसइंड बैंक के सीईओ सुमंत कथपालिया और उनके डिप्टी को इस्तीफा देने के लिए कहा है।
- बैंक के डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में लेखांकन गड़बड़ी पाई गई है।
- आरबीआई चाहता है कि नए नेता बाहर से आएं और यह प्रक्रिया सुचारू रूप से हो।
- मूडीज ने बैंक की रेटिंग को डाउनग्रेड के लिए रिव्यू पर रखा है।
विस्तार से:
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंडसइंड बैंक के सीईओ सुमंत कथपालिया और उनके डिप्टी अरुण खुराना को इस्तीफा देने के लिए कहा है। यह कदम बैंक के डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो में पाई गई लेखांकन गड़बड़ी के बाद उठाया गया है। आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि वह चाहता है कि नए नेता बाहर से आएं और यह प्रक्रिया सुचारू रूप से हो ताकि जमाकर्ताओं का विश्वास बना रहे।
इंडसइंड बैंक भारत का पांचवां सबसे बड़ा प्राइवेट लेंडर है, जिसका बैलेंस शीट 5.4 ट्रिलियन रुपये (63 अरब डॉलर) का है। 10 मार्च को बैंक ने खुलासा किया कि उसके डेरिवेटिव्स पोर्टफोलियो का मूल्यांकन 2.35% अधिक किया गया था, जो करीब 175 मिलियन डॉलर के बराबर है। यह गड़बड़ी आरबीआई के नियमों के खिलाफ थी, जो अप्रैल 2024 में लागू हुए थे।
आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि उसे टॉप मैनेजमेंट पर भरोसा नहीं रह गया है, लेकिन वह चाहता है कि यह प्रक्रिया सुचारू रूप से हो ताकि जमाकर्ताओं का विश्वास बना रहे। एक सूत्र ने बताया कि आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि नए नेता बाहर से आने चाहिए। हालांकि, बैंक का बोर्ड टॉप एक्जीक्यूटिव पदों के लिए सिफारिशें करता है, लेकिन आरबीआई की मंजूरी जरूरी होती है।
इस गड़बड़ी के बाद, आरबीआई ने एक बयान जारी करके जमाकर्ताओं को आश्वस्त किया कि बैंक अच्छी तरह से पूंजीकृत है। हालांकि, इस घटना ने बैंक की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। मूडीज रेटिंग्स ने 17 मार्च को बैंक की रेटिंग को डाउनग्रेड के लिए रिव्यू पर रखा है। मूडीज ने कहा कि यह गड़बड़ी बैंक के रिस्क मैनेजमेंट, कंप्लायंस और रिपोर्टिंग में कमजोरी को दर्शाती है।
इस घटना के बाद, इंडसइंड बैंक के शेयरों में इस महीने 30% से अधिक की गिरावट आई है। बैंक ने बाहरी जांचकर्ताओं को नियुक्त किया है और इस मामले की जांच चल रही है।
निष्कर्ष:
इंडसइंड बैंक के सीईओ और डिप्टी का इस्तीफा बैंक के लिए एक बड़ा झटका है। आरबीआई की सख्त निगरानी और नए नेतृत्व की तलाश बैंक के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगी। जमाकर्ताओं और निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए बैंक को अपने रिस्क मैनेजमेंट और कंप्लायंस सिस्टम को मजबूत करना होगा।
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