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भारत और फ्रांस के सहयोग से ‘मिनी सन’ बनाने का प्रयास, पीएम मोदी आज ITER प्रोजेक्ट का निरीक्षण करेंगे

भारत और फ्रांस के सहयोग से 'मिनी सन' बनाने का प्रयास, पीएम मोदी आज ITER प्रोजेक्ट का निरीक्षण करेंगे

भारत और फ्रांस के सहयोग से ‘मिनी सन’ बनाने का प्रयास, पीएम मोदी आज ITER प्रोजेक्ट का निरीक्षण करेंगे

फ्रांस, 12 फरवरी 2025:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज दक्षिणी फ्रांस के कैडराचे में विश्व के सबसे उन्नत फ्यूजन एनर्जी प्रोजेक्ट, ITER (इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर) का निरीक्षण करेंगे। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य पृथ्वी पर “मिनी सन” बनाकर स्वच्छ और असीमित ऊर्जा की आपूर्ति करना है। यह वैश्विक सहयोग पर आधारित एक ऐतिहासिक पहल है, जिसमें भारत भी प्रमुख भूमिका निभा रहा है।


ITER प्रोजेक्ट: पृथ्वी पर सूरज का प्रयोग

ITER प्रोजेक्ट दुनिया की सबसे महंगी और तकनीकी रूप से उन्नत विज्ञान परियोजना है। इसका लक्ष्य न्यूक्लियर फ्यूजन ऊर्जा का उपयोग करके पृथ्वी पर असीमित ऊर्जा पैदा करना है। यह प्रोजेक्ट सात देशों – अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के सहयोग से चल रहा है। इस परियोजना की कुल लागत 22 बिलियन यूरो (लगभग ₹17,500 करोड़) है, जिसमें भारत लगभग 10% का योगदान कर रहा है।

भारत का योगदान इस प्रोजेक्ट में विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। गुजरात में लार्सन एंड टुब्रो द्वारा बनाया गया दुनिया का सबसे बड़ा रेफ्रिजरेटर भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इस रेफ्रिजरेटर का वजन 3,800 टन से अधिक है, और इसकी ऊंचाई कुतुब मीनार से लगभग आधी है।


न्यूक्लियर फ्यूजन: सूरज की तरह ऊर्जा पैदा करना

न्यूक्लियर फ्यूजन एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, जो हमारे सूरज और अन्य तारों में ऊर्जा पैदा करती है। इस प्रक्रिया में हाइड्रोजन के नाभिक मिलकर हीलियम बनाते हैं, जिससे अपार ऊर्जा उत्पन्न होती है। ITER प्रोजेक्ट का उद्देश्य इस प्रक्रिया को पृथ्वी पर कृत्रिम रूप से पुनः पेश करना है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस प्रक्रिया से बिना किसी हानिकारक ग्रीनहाउस गैस या रेडियोधर्मी कचरे के ऊर्जा पैदा की जा सकती है। एक ग्राम परमाणु ईंधन से लगभग 8 टन तेल के बराबर ऊर्जा पैदा की जा सकती है।


भारत का महत्वपूर्ण योगदान

भारत ने ITER प्रोजेक्ट में अपने तकनीकी और वैज्ञानिक योगदान के माध्यम से विश्व स्तर पर अपनी प्रतिष्ठा बढ़ाई है। भारत ने इस प्रोजेक्ट के लिए सबसे बड़े घटकों का निर्माण किया है, जिसमें दुनिया का सबसे बड़ा क्रायोजेनिक सिस्टम भी शामिल है। इसके अलावा, भारतीय वैज्ञानिकों ने इस प्रोजेक्ट में अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का प्रदर्शन किया है।

भारत का योगदान न केवल तकनीकी है, बल्कि यह वैश्विक सहयोग का एक उदाहरण भी है। इस प्रोजेक्ट में भारत का 10% योगदान होने के बावजूद, वह इस तकनीक का 100% एक्सेस प्राप्त करने का हकदार है।


PM मोदी का यात्रा कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज फ्रांस में ITER प्रोजेक्ट के साइट पर पहुंचेंगे। वह वैज्ञानिकों और अन्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा करेंगे। इसके अलावा, पीएम मोदी फ्रांस के उपराष्ट्रपति वेंस और उनकी पत्नी उषा के साथ भी मुलाकात करेंगे।


भविष्य के लिए उम्मीदें

वैज्ञानिकों का मानना है कि ITER प्रोजेक्ट के सफल होने पर दुनिया में ऊर्जा संकट का समाधान हो सकता है। यह प्रोजेक्ट न केवल स्वच्छ ऊर्जा प्रदान करेगा, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारत के इस प्रोजेक्ट में भागीदारी से देश की तकनीकी क्षमता और वैश्विक सहयोग की भावना का प्रदर्शन हो रहा है। यह प्रोजेक्ट भारत को वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनाने में मदद करेगा।

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