ग्वालियर हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने इस बात पर चिंता जताई है कि स्वर्ण रेखा नदी के जीर्णोद्धार को लेकर तैयार की गई डीपीआर के अनुमोदन के बावजूद सरकार फंड जारी क्यों नहीं कर रही है ?अगली सुनवाई पर सरकार को इस सवाल पर अपना अपनी सफाई पेश करनी होगी। इसके साथ ही स्वर्ण रेखा नदी में गंदगी फैलाने वालों की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की भी नगर निगम के अधिकारियों को सलाह दी गई है ।दरअसल अधिवक्ता विश्वजीत रतौनिया ने हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका का दायर की है। जिस पर पिछले दो साल से सुनवाई चल रही है। याचिका में निवेदन किया गया है कि किसी जमाने में शहर की जीवन दायिनी रही स्वर्णरेखा पुनर्जीवित किया जाए जो वर्तमान में नाले के रूप में तब्दील होकर रह गई है। स्वर्ण रेखा नदी के जीर्णोद्धार के लिए जिला प्रशासन ने एम आई टी एस यानी माधव इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस तथा भोपाल के मौलाना आजाद मैनिट से डीपीआर तैयार कराई थी। जिसका अनुमोदन राज्य समिति और जिला समिति द्वारा किया जा चुका है। बावजूद इसके स्वर्ण रेखा नदी का पुनर्उद्धार नहीं हो सका है। न ही इसके लिए कोई फंड जारी किया गया है। इस पर हाई कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताई है और सिंचाई विभाग जल संसाधन नगर निगम के अफसरों को अगली सुनवाई पर इस मुद्दे पर अपना जवाब पेश करने को कहा है। साथ ही हाई कोर्ट ने कहा है कि स्वर्णरेखा नदी में गंदगी फैलाने और कचरा फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। जिससे ऐसे लोगों की पहचान हो सके और उनके खिलाफ जिला प्रशासन उचित कार्रवाई कर सके। हाई कोर्ट ने सरकार के अधिवक्ता और वहां मौजूद अफसरों से कहा कि जिस तरह इंदौर में भिक्षावृत्ति पर सख्ती के साथ रोक लगाई गई है साबरमती नदी को पुनर्जीवित किया गया है तो फिर स्वर्ण रेखा नदी पुनर्जीवित क्यों नहीं हो सकती। इस पर गौर करने की जरूरत है। साथ ही हाईकोर्ट में जल संसाधन विभाग से जाना की नदी में किस तरह से साफ पानी आ सकता है ।
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