Hormuz: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही को लेकर अहम घोषणा की है। ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को ट्रांजिट से जुड़ी पाबंदियों में छूट देने की बात कही है। इस फैसले के बाद इन चार देशों के जहाजों को इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने की अनुमति मिल गई है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मुकद्दम ने इसकी जानकारी दी।
ईरान के इस कदम को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासकर भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों के लिए होर्मुज से जहाजों की निर्बाध आवाजाही काफी अहम है। हालांकि, इस सूची में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं होने के बाद वहां के राजनीतिक और विदेश नीति से जुड़े हलकों में सवाल उठने लगे हैं।
Hormuz: पाकिस्तान में ईरान के फैसले पर क्यों हो रही चर्चा
ईरान की ओर से चार देशों को छूट दिए जाने के बाद पाकिस्तान के कई विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूजर्स ने हैरानी जताई है। उनकी नाराजगी की एक बड़ी वजह यह है कि पाकिस्तान को इस सूची में जगह नहीं मिली, जबकि वह ईरान का पड़ोसी देश है। इसके अलावा पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने तथा युद्धविराम की कोशिशों में मध्यस्थ की भूमिका निभाने का प्रयास भी किया है।
पाकिस्तान में कुछ लोगों का तर्क है कि भारत को इस छूट का लाभ मिल रहा है, जबकि नई दिल्ली के इजरायल के साथ संबंध भी हैं। वहीं, पाकिस्तान ने हाल के समय में कूटनीतिक स्तर पर ईरान के साथ संपर्क बनाए रखा है। ऐसे में पाकिस्तान को छूट नहीं मिलने को लेकर वहां के विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं।
Hormuz: पाकिस्तानी विदेश नीति विशेषज्ञ ने उठाए सवाल
पाकिस्तान के विदेश नीति विशेषज्ञ और इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटेजिक स्टडीज (ISSI) के निदेशक डॉ. खुर्रम अब्बास ने ईरान के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि ईरान ने चीन, भारत, इराक और कतर के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की पाबंदियों में छूट दी है। इन देशों के जहाज अब इस मार्ग से आवाजाही कर सकते हैं।
खुर्रम अब्बास ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान को इस व्यवस्था से बाहर क्यों रखा गया है। उनके मुताबिक, भारत को दवाओं की आपूर्ति से जुड़ी जरूरतों के कारण और चीन को राजनीतिक समर्थन के मद्देनजर राहत दी गई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भी ऊर्जा के लिहाज से महत्वपूर्ण देश है और अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम कराने के प्रयासों में उसकी भूमिका रही है। इसके बावजूद ईरान की ओर से घोषित छूट में पाकिस्तान का नाम शामिल नहीं है।
Hormuz: भारत और चीन को छूट देने के पीछे क्या है वजह
ईरानी सांसद अमीर हयात मुकद्दम ने बताया कि अलग-अलग देशों को दी गई राहत के पीछे अलग-अलग कारण और समझौते हैं। उनके अनुसार, ईरान कतर के जहाजों से होर्मुज से गुजरने के लिए ट्रांजिट टोल नहीं लेता है। वहीं, भारत और चीन के साथ इस संबंध में अलग तरह की व्यवस्थाएं रही हैं।
Iran’s parliament official says Tehran has exempted ships from China, India, Iraq & Qatar from Hormuz transit restrictions — they can pass freely (India for meds, China for political support). Pakistan, a key mediator with energy exposure, was not named. Why the omission? #Hormuz #Iran #Pakistan #India— Dr. Khurram Abbas (@itskhurramabbas) November 4, 2026
मुकद्दम के मुताबिक, भारत को दी गई छूट का एक उद्देश्य ईरान में दवाओं के आयात को आसान बनाना है। इससे जरूरी दवाओं और चिकित्सा से जुड़ी वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका कम हो सकती है। दूसरी ओर, चीन को राहत देने के पीछे बीजिंग से राजनीतिक समर्थन हासिल करना भी एक अहम वजह बताई गई है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इन देशों को मिली छूट किसी एक साझा व्यवस्था का हिस्सा नहीं है, बल्कि प्रत्येक देश के साथ अलग-अलग व्यापारिक और कूटनीतिक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया गया है।
Hormuz: दुनिया के लिए क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र के कई प्रमुख तेल और गैस उत्पादक देशों से ऊर्जा संसाधनों की बड़ी खेप इसी रास्ते से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचती है।
भारत सहित एशिया के कई देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र से होने वाली आपूर्ति पर निर्भर हैं। ऐसे में इस समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की रोक या बाधा का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक तेल और गैस बाजार पर भी पड़ सकता है। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से परिवहन लागत और ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ जाती है।
Hormuz: होर्मुज में पाबंदियों का वैश्विक असर
रिपोर्ट के मुताबिक, फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कदम के तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही सीमित करने का ऐलान किया था। इसके बाद इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को लेकर सख्ती बढ़ गई और केवल कुछ जहाजों को ही आगे बढ़ने की अनुमति दी गई।
इसका असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार पर पड़ा। होर्मुज में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंताएं गहराईं और पेट्रोलियम बाजार में कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका पैदा हुई। ऐसे माहौल में भारत, चीन, इराक और कतर को दी गई छूट को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हालांकि, पाकिस्तान को इस सूची से बाहर रखने के पीछे ईरान की आधिकारिक वजह क्या है, इस पर स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल ईरानी प्रतिनिधि ने अलग-अलग देशों को दी गई राहत के पीछे व्यापारिक और कूटनीतिक कारणों का उल्लेख किया है।


