BY: Yoganand Shrivastva
Virender Sehwag टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने अपने दोनों क्रिकेटर बेटों (आर्यवीर और वेदांत) को पैसे और शोहरत की अहमियत को लेकर एक बेहद व्यावहारिक पाठ पढ़ाया है। एक इंटरव्यू के दौरान सहवाग ने किस्सा साझा करते हुए बताया कि उनके बेटे क्रिकेट के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। एक बार जब उनके बेटे ने अपनी गाड़ी में खुद 7,000 रुपये का पेट्रोल भरवाया और जेब से पैसे कटे, तब उसे समझ आया कि कमाई करना और पैसे खर्च करना कितना अलग अनुभव होता है।
दिखावे की नकली जिंदगी से दूर रहने की सख्त हिदायत
Virender Sehwag सहवाग का मानना है कि आज की युवा पीढ़ी भौतिकवादी चकाचौंध की तरफ बहुत जल्दी आकर्षित हो जाती है। उनके बेटे भी अक्सर उनसे महंगी घड़ियां मांगकर पहनते हैं। इस पर सहवाग उन्हें समझाते हैं कि यह सब केवल दिखावा है और जिंदगी में इन चीजों का कोई स्थायी मोल नहीं है। उन्होंने अपने बच्चों को हमेशा दिखावे से दूर रहकर अपने दम पर कुछ सार्थक करने और एक स्पष्ट मकसद के साथ जीने की सलाह दी है।
पिता के नाम के भारी दबाव और आलोचनाओं से बेअसर रहने का मंत्र
Virender Sehwag क्रिकेटर पिता की संतान होने के नाते आर्यवीर और वेदांत पर हमेशा बेहतर प्रदर्शन का दबाव और तुलना का सामना करने की चुनौती रहती है। सहवाग ने उन्हें बचपन से ही सिखाया है कि लोग अपनी राय रखेंगे और आलोचना भी करेंगे, लेकिन उन्हें इन सब बातों से पूरी तरह बेअसर रहना चाहिए। उन्होंने ‘हाथी चले बाजार…’ की तर्ज पर बच्चों को समझाया कि आलोचकों की परवाह किए बिना बस अपने लक्ष्य की तरफ अडिग होकर आगे बढ़ते रहना चाहिए।


