Report: Alok Bhardwaj
किसानों की जमीन के इस्तेमाल और फर्जी पंजीयन के आरोप, जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब ?
Bhind Wheat Procurement Scam रबी विपणन वर्ष 2026-27 में गेहूं उपार्जन व्यवस्था में सामने आए कथित फर्जीवाड़े ने प्रशासनिक निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले में दूसरे किसानों की जमीन के सर्वे नंबरों का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन और उपार्जन किए जाने का मामला सामने आ चुका है। एक रिपोर्ट के मुताबिक लहार क्षेत्र में 23 किसानों के नाम पर 6970 क्विंटल गेहूं की बिक्री और करीब 1.83 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया था, जिसके बाद चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर सामने आ रहे कुछ अन्य आरोपों को लेकर कार्रवाई की स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि सेवा सहकारी संस्था दीनपुरा से जुड़े मामले में किसानों की कृषि भूमि के सर्वे क्रमांकों का उनकी अनुमति के बिना इस्तेमाल कर पंजीयन कराया गया। ऐसे आरोपों की जांच और जिम्मेदारों की भूमिका स्पष्ट होना अभी बाकी है।
अनोज कुमार और आशीष पाठक पर आरोप, खातों में भुगतान का दावा
Bhind Wheat Procurement Scam मामले में अनोज कुमार को मुख्य आरोपी बताए जाने का दावा किया जा रहा है। आरोप है कि अन्य किसानों के खेती संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर पंजीयन कराया गया। वर्तमान में अनोज कुमार के सहकारी संस्था भिंड के प्रभारी प्रबंधक होने की बात भी सामने रखी गई है।

इसी तरह आशीष पाठक पर भी दूसरे किसानों की जमीन के सर्वे क्रमांकों का कथित रूप से इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार दोनों मामलों में किसानों की उपजाऊ भूमि के सर्वे क्रमांकों का बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
यह भी दावा किया गया है कि शासकीय राशि का आहरण अनोज कुमार और आशीष पाठक से जुड़े सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के खातों में किया गया। हालांकि इन आरोपों और बैंक खातों से जुड़े दावों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
फर्जीवाड़े पर कार्रवाई होगी या फाइलों में दब जाएगा मामला?
Bhind Wheat Procurement Scam सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसानों की जमीन के सर्वे नंबरों का गलत इस्तेमाल कर पंजीयन कराया गया और सरकारी भुगतान लिया गया, तो पंजीयन से लेकर उपार्जन और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया में जिम्मेदारी किसकी थी? किसानों की जमीन का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और दस्तावेजों की जांच किसने की, यह भी जांच का अहम हिस्सा होना चाहिए।
भिंड में रबी उपार्जन से जुड़े एक मामले में पुलिस एफआईआर दर्ज कर चुकी है और अन्य जिम्मेदारों की भूमिका भी जांच के दायरे में बताई गई है। ऐसे में सामने आ रहे अन्य आरोपों पर भी निष्पक्ष जांच और स्पष्ट कार्रवाई की जरूरत है। किसानों के नाम और जमीन का इस्तेमाल कर यदि किसी ने सरकारी व्यवस्था का दुरुपयोग किया है, तो जांच के बाद दोषियों की जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती है।
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