PoK Protest: पाकिस्तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक और निर्वासित नेता अल्ताफ हुसैन ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर हुई कथित कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग कर रहे निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग बेहद दुखद है और इस तरह की घटनाएं मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
अल्ताफ हुसैन का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सोशल मीडिया पर PoK में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जुड़े कई वीडियो और तस्वीरें चर्चा में हैं। हालांकि, इन दावों और घटनाओं को लेकर अलग-अलग स्रोतों में अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।
PoK Protest: सोशल मीडिया संबोधन में सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
सोशल मीडिया के जरिए आयोजित एक आपात बैठक को संबोधित करते हुए अल्ताफ हुसैन ने कहा कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई इलाकों में लोग लंबे समय से अपने बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
#WATCH London: Founder of Pakistan’s Muttahida Qaumi Movement (MQM) party, Altaf Hussain sings 'Saare jahan se acha Hindustan hamara.' pic.twitter.com/4IQKYnJjfB
— ANI (@ANI) August 31, 2019
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार करने के बजाय सरकार ने सुरक्षा बलों का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है।
PoK Protest: निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई का लगाया आरोप
अल्ताफ हुसैन ने दावा किया कि जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर रावलाकोट, मीरपुर और अन्य क्षेत्रों में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलीबारी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में कई लोग घायल हुए और कई लोगों की जान चली गई। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ घायलों और मृतकों को सुरक्षा एजेंसियां अपने साथ ले गईं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
PoK Protest: अस्पतालों में इलाज प्रभावित होने का भी लगाया आरोप
MQM प्रमुख ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के बाद कुछ अस्पतालों में सुरक्षा बलों की मौजूदगी के कारण घायलों के उपचार में बाधाएं आईं। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी घायल व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिलता है, तो यह गंभीर मानवीय चिंता का विषय है।
हालांकि, इन आरोपों पर पाकिस्तान सरकार की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
PoK Protest: ’79 वर्षों से कश्मीर के नाम पर राजनीति की गई’
अल्ताफ हुसैन ने अपने संबोधन में पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व और सरकारी संस्थानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दशकों से कश्मीर के मुद्दे पर राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर अभियान चलाए गए, लेकिन जब स्थानीय लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं तो उन्हें बल प्रयोग का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या लोगों की आवाज को दबाकर किसी समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
PoK Protest: अंतरराष्ट्रीय मीडिया और सोशल मीडिया का किया जिक्र
अपने संबोधन के दौरान अल्ताफ हुसैन ने कहा कि उन्हें सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया पर सामने आ रही तस्वीरों और वीडियो को देखकर गहरा दुख हुआ।
उन्होंने पाकिस्तान सरकार से अपील की कि प्रदर्शनकारियों के साथ संवाद का रास्ता अपनाया जाए और हिंसा की घटनाओं को रोका जाए। साथ ही उन्होंने मृतकों के प्रति श्रद्धांजलि और उनके परिवारों के प्रति संवेदना भी व्यक्त की।
PoK Protest: कौन हैं अल्ताफ हुसैन?
अल्ताफ हुसैन पाकिस्तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट (MQM) के संस्थापक हैं। वर्ष 1992 में उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका जताते हुए पाकिस्तान छोड़ दिया था और तब से वह ब्रिटेन की राजधानी लंदन में निर्वासन का जीवन बिता रहे हैं।
हाल के दिनों में उनका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा, जिसमें वह प्रसिद्ध कवि अल्लामा इकबाल द्वारा लिखित गीत ‘सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा’ गाते हुए दिखाई दिए थे।
PoK Protest: JAAC के अल्टीमेटम के बाद तेज हुआ आंदोलन
रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने 27 जुलाई को सरकार को अपनी मांगों पर निर्णय लेने के लिए समय सीमा दी थी। संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि मांगें स्वीकार नहीं की गईं तो रावलाकोट से मुजफ्फराबाद तक बड़ा मार्च निकाला जाएगा।
बातचीत सफल नहीं होने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रावलाकोट में एकत्र हुए और मार्च शुरू किया। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की घटनाएं सामने आईं।
PoK Protest: मृतकों के आंकड़ों पर अलग-अलग दावे
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। JAAC का कहना है कि 5 जून से 28 जुलाई के बीच 67 लोगों की मौत हुई है, जबकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि की गई है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है।
PoK Protest: फिलहाल स्थिति पर बनी हुई है नजर
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हालात को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रखी जा रही है। क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और विरोध प्रदर्शनों को लेकर प्रशासन सतर्क है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है या नहीं, इस पर सभी की नजरें बनी हुई हैं।



