रिपोर्ट – प्रेमपाल सिंह
Firozabad Shikohabad Child Murder Case फिरोजाबाद के शिकोहाबाद में करीब सवा महीने पहले हुए एक बेहद क्रूर और दिल दहला देने वाले हत्याकांड में न्यायपालिका ने त्वरित कार्रवाई की मिसाल पेश की है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने डेढ़ वर्षीय मासूम बच्चे की निर्मम हत्या के आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को उपलब्ध वैज्ञानिक और चश्मदीद साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार दे दिया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. बब्बू सारंग ने मामले की अंतिम सुनवाई के बाद आरोपी को कड़ा दोषी माना है। अब अदालत शुक्रवार को इस दोषी दरिंदे की सजा पर अपना अंतिम और बड़ा फैसला सुनाएगी।

Firozabad Shikohabad Child Murder Case दिल दहला देने वाली वारदात: सड़क पर पटक-पटक कर ली थी मासूम की जान
जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) राजीव प्रियदर्शनीय ने मामले की वीभत्सता की जानकारी देते हुए बताया कि यह हृदयविदारक घटना इसी वर्ष 29 मई को शिकोहाबाद थाना क्षेत्र में घटित हुई थी। आरोपी विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए महज डेढ़ साल के एक बेकसूर बच्चे को सड़क पर बेरहमी से पटक-पटक कर मौत के घाट उतार दिया था। इस सनसनीखेज और अमानवीय वारदात के बाद पूरे फिरोजाबाद जिले की जनता में भारी आक्रोश और शोक की लहर दौड़ गई थी।
Firozabad Shikohabad Child Murder Case पुलिस और कोर्ट की एतिहासिक मुस्तैदी: मात्र 6 दिन में चार्जशीट, 39 दिन में दोषसिद्धि

मासूम की जघन्य हत्या को गंभीरता से लेते हुए फिरोजाबाद पुलिस ने इस केस में रिकॉर्ड समय में काम किया। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए घटना के महज 6 दिनों के भीतर सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज और पुख्ता सबूत जुटाकर चार्जशीट (आरोप पत्र) माननीय न्यायालय में दाखिल कर दी थी। इसके बाद अदालत ने भी मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसे प्राथमिकता (फास्ट ट्रैक) पर लिया और कड़े कानूनी चक्रव्यूह के बीच महज 39 दिनों के भीतर आरोपी के खिलाफ दोषसिद्धि (Conviction) की कानूनी प्रक्रिया पूरी कर ली।
Firozabad Shikohabad Child Murder Case कड़ी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेशी, कल होगा फांसी या उम्रकैद का फैसला
गुरुवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट परिसर में तनाव और संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। आरोपी विराज को भारी पुलिस सुरक्षा घेरे के बीच जज के सामने पेश किया गया था, जहां उसे दोषी ठहराया गया। कानून के जानकारों का मानना है कि अपराध की इस क्रूरतम प्रकृति (Rarest of Rare) को देखते हुए दोषी को उम्रकैद या फांसी की सजा तक हो सकती है। अब पूरे प्रदेश और पीड़ित परिवार की निगाहें शुक्रवार को होने वाले कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।





