BY
Yoganand Shrivastava
Gwalior Smart City Reality Check केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्मार्ट सिटी योजना’ के तहत करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाकर ग्वालियर को आधुनिक बनाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन हकीकत यह है कि शहर के सबसे व्यस्त और वीआईपी रूट पर नगर निगम और स्मार्ट सिटी के अफसरों की लापरवाही साफ तौर पर रेंगती नजर आ रही है। रॉक्सी पुल से ऐतिहासिक महाराज बाड़े को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग के बीचों-बीच लगा एक लोहे के चैंबर का ढक्कन पिछले काफी लंबे समय से बुरी तरह क्षतिग्रस्त (टूटा) पड़ा हुआ है। शहर के दिल कहे जाने वाले इस रास्ते पर महीनों से मंडरा रहा यह मौत का कुआं अफसरों की फाइलों में दर्ज ‘स्मार्ट ग्वालियर’ के दावों की सरेआम धज्जियां उड़ा रहा है।
Gwalior Smart City Reality Check हजारों वाहनों की रोजाना आवाजाही, पर अंधा बना बैठा है जिम्मेदार नगर निगम प्रशासन
बता दें कि रॉक्सी पुल से महाराज बाड़ा मार्ग शहर के सबसे व्यस्ततम व्यावसायिक और आवाजाही वाले इलाकों में से एक है। इस सिंगल और मुख्य रोड से प्रतिदिन हजारों की संख्या में दोपहिया वाहन, ऑटो, ई-रिक्शा और कारें गुजरती हैं। व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) में यहाँ वाहनों का भारी दबाव रहता है। हैरत की बात यह है कि इस टूटे हुए लोहे के चैंबर के ऊपर से रोज सैकड़ों वीआईपी और नगर निगम के आला अधिकारियों की गाड़ियां भी गुजरती हैं, लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अफसर की निगाह इस जानलेवा गड्ढे और क्षतिग्रस्त ढक्कन पर नहीं पड़ी है।

Gwalior Smart City Reality Check राहगीरों और वाहन चालकों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ बना रास्ता, रात के अंधेरे में बढ़ता है खतरा
सड़क के बिल्कुल बीचों-बीच लोहे के नुकीले और धंसे हुए ढक्कन के कारण यह पूरी जगह एक ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बन चुकी है। जरा सा संतुलन बिगड़ते ही कोई भी दोपहिया वाहन चालक इस कटीले लोहे की चपेट में आकर गंभीर हादसे का शिकार हो सकता है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि दिन के उजाले में तो लोग जैसे-तैसे बचकर निकल जाते हैं, लेकिन रात के समय या हल्की बारिश के दौरान यह क्षतिग्रस्त ढक्कन दिखाई नहीं देता, जिससे यहाँ हर वक्त बड़ी दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है।
Gwalior Smart City Reality Check जनता पूछ रही तीखा सवाल— ‘क्या ऐसे ही बनेगा हमारा स्मार्ट शहर ग्वालियर?’
इस बदहाली को लेकर स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों में नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब शहर के सबसे मुख्य और ऐतिहासिक केंद्र (महाराज बाड़ा) को जोड़ने वाली सड़क का यह हाल है, तो अंदरूनी वार्डों की स्थिति क्या होगी, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। जनता अब सोशल मीडिया और सड़कों पर तीखे सवाल पूछ रही है कि क्या इसी टूटी-फूटी व्यवस्था और प्रशासनिक अंधापन के भरोसे हमारा ग्वालियर स्मार्ट सिटी बनेगा? क्या प्रशासन किसी मासूम की जान जाने के बाद ही इस ढक्कन को बदलने की जहमत उठाएगा?





