Report: Alok Bharadwaj
Bhind Agriculture Department Controversy मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों और कृषि विभाग के भीतर वरिष्ठता को दरकिनार करने और अधिकारियों के साथ होने वाले कथित शोषण का एक बेहद गंभीर और अमानवीय मामला सामने आया है। भिंड जिले में पदस्थ सहायक संचालक कृषि गौरीशंकर बेले ने विभाग और शासन की नीतियों से आहत होकर अपना दर्द बयां किया है। गंभीर हृदय रोग (Heart Disease) से ग्रसित इस वरिष्ठ अधिकारी ने प्रभारी उपसंचालक पर आए दिन प्रताड़ित करने के संगीन आरोप लगाए हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि पीड़ित अधिकारी ने यहाँ तक कह दिया है कि इस अमानवीय व्यवहार और कनिष्ठ के अधीन कार्य करने से बेहतर है कि वह मौत को गले लगा लें।

Bhind Agriculture Department Controversy वरिष्ठता को ताक पर रखकर जूनियर को सौंपा प्रभार
Bhind Agriculture Department Controversy सहायक संचालक गौरीशंकर बेले का मुख्य आरोप है कि शासन द्वारा प्रशासनिक नियमों और वरिष्ठता (Seniority) की सूची को पूरी तरह दरकिनार कर अनैतिक तरीके से प्रभार सौंपे गए हैं।
- बैच का बड़ा अंतर: पीड़ित अधिकारी गौरीशंकर बेले 2003 बैच के वरिष्ठ अधिकारी हैं।
- कनिष्ठ को कमान: इसके बावजूद शासन ने 2016 बैच के कनिष्ठ (जूनियर) अधिकारी रामसुजान शर्मा को उपसंचालक पद का प्रभारी बना दिया।
एक बेहद जूनियर अधिकारी को अपने से वरिष्ठ अधिकारी के सिर पर बिठा दिए जाने से पीड़ित अधिकारी का प्रशासनिक आत्मसम्मान बुरी तरह आहत हुआ है।
Bhind Agriculture Department Controversy गंभीर बीमारी के बावजूद नहीं हुआ तबादला, शोषण के आरोप
गौरीशंकर बेले ने वर्तमान प्रभारी उपसंचालक कृषि रामसुजान शर्मा पर आरोप लगाया है कि वे अपनी कुर्सी के रसूख के चलते आए दिन उनका मानसिक और प्रशासनिक शोषण करते हैं। पीड़ित अधिकारी लंबे समय से गंभीर हृदय रोग से जूझ रहे हैं और उनके स्वास्थ्य की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उन्होंने स्वास्थ्यगत और पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए शासन से भिंड से अन्यत्र स्थानांतरण (Transfer) की गुहार लगाई थी, जिसे प्रशासनिक असंवेदनशीलता के चलते लगातार ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
Bhind Agriculture Department Controversy पीड़ित पत्नी ने भी लगाई शासन से न्याय की गुहार
इस पूरे घटनाक्रम और प्रताड़ना के चलते अधिकारी का पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव में है। सहायक संचालक कृषि गौरीशंकर बेले की धर्मपत्नी ने भी अब खुलकर पति के जीवन की रक्षा और न्याय के लिए शासन-प्रशासन के उच्चाधिकारियों से गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि उनके पति की गंभीर चिकित्सीय स्थिति और वरिष्ठता का सम्मान करते हुए उनका तत्काल भिंड से स्थानांतरण किया जाए और इस प्रताड़ना पर रोक लगाई जाए।
यह मामला अब सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है, जो यह सोचने पर मजबूर करता है कि जब विभाग के भीतर ही वरिष्ठ अधिकारी सुरक्षित और न्यायसंगत माहौल में नहीं हैं, तो व्यवस्था का ढांचा कैसे सुधरेगा।





