भारत में ‘नॉलेज पूल’, कितने पास कितने दूर !

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'Knowledge Pool' in India, how close and how far!

देश में ‘’नॉलेज पूल’’ बनाने की योजना कितनी सफल?

by: Rakhi Verma


-एआई और तकनीकी बदलावों के कारण श्रम बाजारों में परिवर्तन
-59% पेशेवरों को सीखना होगा रोजगारपरक नया कौशल
-41 फीसदी कंपनियों की छंटनी की योजना
-स्किल गैप एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा

देश में 2030 तक 17 करोड़ रोजगार पैदा होने के साथ 9.2 करोड़ नौकरियां खोनी पड़ सकती है। जिसके बाद 7.8 करोड़ नौकरियां ही सृजित होंगी। विश्व आर्थिक मंच के नौकरी सृजन प्रमुख टिल लियोपोल्ड का कहना है कि एआई और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों के कारण श्रम बाजारों में परिवर्तन देखा जा रहा है। और इस परिवर्तन से भारत के सन्दर्भ में चिंतन करने की जरूरत है क्योकि भारत को यहाँ टेक सप्लायर ना बताकर कंज्यूमर दिखाया गया है | ऐसे में एक तिहाई भारतीय कंपनियां डिग्री की जरूरत ख़त्म करके देश में मौजूद नॉलेज पूल से इंजीनियर हायर करने की योजना बना रही है ऐसे में भारत का स्किल डेवलपमेंट कहाँ है ? क्या है इसका मुख्य कारण ? क्या स्किल गैप एक बड़ी चुनौती है ? इसी मुद्दे पर पढ़िए ये लेख, स्वदेश एजेंडा में चुनौती और समाधान पर चर्चा भी देख सकते हैं, लेख के नीचे लिंक है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 के अनुसार, 2030 तक वैश्विक स्तर पर 17 करोड़ नई नौकरियां आएंगी, जबकि 9.2 करोड़ नौकरियां समाप्त हो जाएंगी. जिन नौकरियों में वृद्धि होगी उनमें

नौकरियों में उतार-चढ़ाव
• सॉफ्टवेयर डेवलपर,नर्सिंग प्रोफेशनल्स से लेकर खेतिहर मजदूर शामिल हैं
• जिन नौकरियों में गिरावट आएगी उनमें कैशियर, क्लर्क, अकाउंटेंट से लेकर सिक्योरिटी गार्ड तक शामिल हैं

विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) की फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025 में बताया गया है कि ये बदलाव मुख्य रूप से तकनीकी विकास, हरित (ग्रीन) बदलाव, आर्थिक और डेमोग्राफिक परिवर्तनों की वजह से आएंगे | नियोक्ताओं को उम्मीद है कि 2030 तक नौकरी बाजार में जरूरी 39% प्रमुख कौशल बदल जाएंगे. यह बदलाव भले ही बड़ा हो, लेकिन 2023 के 44% से कम है. कंपनियों ने निरंतर सीखने, अपस्किलिंग (नई कौशल सीखना) और रिस्किलिंग (पुरानी कौशलों को अपडेट करना) जैसे कार्यक्रमों पर ध्यान देकर इन बदलावों को बेहतर तरीके से समझना और प्रबंधित करना शुरू कर दिया है. आने वाले पांच वर्षों में टेक्निकल स्किल्स सबसे तेजी से महत्वपूर्ण बनेंगे | जिनमे,

भविष्य में सफल होने के लिए ये स्किल्स होंगे जरूरी
• आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा
• नेटवर्क और साइबर सिक्योरिटी
• टेक्नोलॉजिकल लिटरेसी
• टेक्निकल स्किल्स के साथ क्रिएटिव थिंकिंग
• सहनशीलता, फुर्ती, जिज्ञासा और सीखने की क्षमता देखी जाएगी

स्विट्जरलैंड के दावोस में 20 से 25 जनवरी को होने वाले विश्व आर्थिक मंच की सालाना बैठक से कुछ दिन पहले जारी रिपोर्ट में कहा गया है,

बैठक के मुख्य बिंदु
• कौशल अंतर आज भी व्यवसाय में बदलाव को लेकर सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है
• नौकरी के लिए जरूरी लगभग 40 फीसदी कौशल में बदलाव होना तय है
• 63 फीसदी कंपनियों का कहना है कि सही कौशल वाले कर्मचारियों को ढूंढ़ना मुश्किल हो रहा है
• दुनियाभर के हर 100 कर्मचारियों में से 59 को 2030 तक नए कौशल सीखने की जरूरत होगी
• इनमें भी 11 फीसदी को यह प्रशिक्षण मिलने की संभावना नहीं है
• दुनियाभर के आधे से अधिक नियोक्ता
• अपने व्यापार मॉडल को एआई की वजह से
• पैदा हुए नए अवसरों के मुताबिक बदलने की योजना बना रहे हैं
• 77 फीसदी नियोक्ता अपने कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना चाहते हैं
• जबकि 41 फीसदी कंपनियां ऑटोमेशन की वजह से छंटनी की योजना बना रही हैं
• कौशल अंतर पाटने और तेजी से बढ़ते रोजगार के लिहाज से
• कर्मचारियों को तैयार करने के लिए
• सरकारों, कंपनियों और शिक्षा प्रणालियों को तत्काल सहयोग करने की जरूरत है

उधर ग्लोबल स्किल रैंकिंग को देशों की स्थिति के आधार पर चार कैटेगरी में विभाजित किया गया है. इसमें सबसे पहले नंबर आता है अत्याधुनिक कैटगरी का जिसमे

ग्लोबल स्किल रैंकिंग में देशों की स्थिति
• यूरोप, एशिया प्रशांत के कुछ हिस्सों और लैटिन अमेरिका के देश शामिल है
• दूसरे नंबर पर कॉम्पेटेटिल कैटेगरी आती है जिसमे
• यूरोपीय देश, लैटिन अमेरिका, तुर्की और संयुक्त अरब अमीरात सहित एशिया प्रशांत के कुछ हिस्से शामिल हैं
• तीसरे नंबर पर इमरजिंग कैटेगरी आती है जिसमे
• उत्तरी अमेरिका, एशिया प्रशांत के कुछ हिस्से, यूरोप
• मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देश शामिल हैं
• आखिरी कैटेगरी यानी लैगिंग कैटेगरी जिसमे मुख्य रूप से
• एशिया प्रशांत, मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और उप-सहारा अफ्रीका के देश शामिल हैं

भारत रैंकिंग में 87वें स्थान पर है, जो इसे स्किल के मामले में पिछड़ी कैटेगरी में रखता है. GenAI कोर्स के लिए एनरोल्मेंट में देश की उल्लेखनीय 1,648 फीसदी वृद्धि अत्याधुनिक तकनीक में मजबूत रुचि को दर्शाती है. यह प्रवृत्ति सरकार द्वारा AI में 1.2 बिलियन डॉलर के पर्याप्त निवेश से संबंधित है. शिक्षार्थी प्रोग्रामिंग लैंग्वेज और एप्लाइड मशीन लर्निंग में महारत हासिल करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य वेब डेवलपर, सॉफ़्टवेयर डेवलपर और मशीन लर्निंग इंजीनियर जैसी तकनीकी भूमिकाओं के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करना है उधर डिजिटल स्किल गैप की चुनौती भी सामने है

डिजिटल स्किल गैप भी चुनौती
• 10 में से 9 से ज़्यादा नौकरियों के लिए कम से कम डिजिटल प्रोफिएंसी की जरूरत होती है
• यूरोप में 70 फीसदी व्यवसाय डिजिटल स्किल की कमी को निवेश के लिए एक बड़ी बाधा मानते हैं
• 40 प्रतिशत वयस्कों के पास बुनियादी डिजिटल स्किल भी नहीं है
• यह चुनौती सिर्फ यूरोप तक ही सीमित नहीं है
• कई क्षेत्रों में शिक्षार्थी आज के वर्कफोर्स में
• जरूरी डिजिटल स्किल की तुलना में ह्यूमन स्किल को प्राथमिकता दे रहे हैं

भारत में नए शिक्षार्थियों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है. यह बढ़ोतरी पिछले वर्षों की तुलना में स्किल रैंकिंग को प्रभावित कर सकती है. हालांकि प्रोफेशनल सर्टिफिकेट्स में नामांकन स्थिर रहा है, लेकिन स्पेशलाइजेशन एनरोल्मेंट में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो डायवर्स कंटेंट में व्यापक रुचि को दर्शाता है. सामाजिक-सांस्कृतिक बाधाओं और एक्सेस संबंधी समस्याओं का सामना करने के बावजूद, भारत स्किल गैप को कम करने और कॉम्पेटेटिव फोर्स को बढ़ावा देने में उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है.

छठी वार्षिक एनुअल स्किल रिपोर्ट में:

• एआई साक्षरता को एक अहम ग्लोबल प्रायोरिटी के रूप में दर्शाया गया है
• रिपोर्ट में GenAI, डिजिटल ट्रांसफोर्मेशन और ऑटोमैटेशन
• संचालित कई महत्वपूर्ण रुझानों को दर्शाया गया है
• 2022 में ChatGPT की शुरुआत ने AI साक्षरता की दिशा में वैश्विक स्तर पर एक कदम बढ़ाया है
• पिछले एक साल में दुनिया भर में GenAI कोर्स में एनरोलमेंट में 1,060 फीसदी की वृद्धि हुई है
• जो फंडामेंटल AI स्किल की तलाश करने वाले शिक्षार्थियों द्वारा प्रेरित है

एक चिंता भारत को टेक सप्प्लायर ना दिखाकर, बड़ा कंज्यूमर बताने की भी है वित्तीय सेवा फर्म यूबीएस ने अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए तैयार है। यह 2026 तक दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार बन जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, उपभोक्ता बाजार के मामले में:

• भारत 2024 तक जर्मनी और 2026 तक जापान को पीछे छोड़ देगा
• वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर लेगा
• बड़ी आबादी और बढ़ते मध्यम वर्ग से भारत की तीव्र प्रगति को मदद मिल रही है
• 2023 में भारत की घरेलू खपत 2.1 ट्रिलियन डॉलर रही है, जो पिछले दशक से लगभग दोगुनी है
• यह 7.2 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर के साथ बढ़ी है
• यह विकास दर चीन, अमेरिका और जर्मनी जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं से ज्यादा है।
• 2023 में भारत में करीब चार करोड़ लोग समृद्ध वर्ग में शामिल थे
• जिनकी वार्षिक आय 10 हजार डॉलर (करीब 8.35 लाख रुपये) से अधिक थी
• यह 15 वर्ष या इससे अधिक आयु की कुल आबादी का चार प्रतिशत था
• अनुमानों से संकेत मिलता है कि यह आंकड़ा अगले पांच वर्षों में दोगुना से अधिक हो जाएगा
• जो भारतीयों के बीच क्रय शक्ति के महत्वपूर्ण विस्तार का संकेत देता है

कुल मिलाकर देश में नॉलेज पूल बनाने की जो योजना है वो कैसे पूरी होगी स्किल गैप एक चुनौती है, नौकरियां मिलेंगी तो घटेंगी भी उधर बढती नई TECHNOLOGY के बीच भारतीय डिग्रियों को खत्म कर बाहर से इंजिनियर हायर करने की योजना से भारत को कितना फायदा होगा और ये नॉलेज पूल कैसे बनेगा ये बड़ा सवाल है | इतना ही नहीं सबसे बड़ी चुनौती अपने स्किलड फ़ाईन ब्रेन को देश में रोकने की भी है ताकि वे देश में अपने जैसी वर्क फ़ोर्स तैयार कर सके इसके साथ ही जो फ़ाईन ब्रेन्स दुसरे देशों में बस गए है उन्हें स्वदेश वापस कैसे बुलाएँ ? इन चुनौतियों पर भारत काम कर लेता है तो भारत के कंज्यूमर कंट्री बनने के साथ साथ दुनिया के लिए टेक सप्लायर भी बन पायेगा |

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