Isa Ahmad
Netherlands Child Euthanasia: कानून में बदलाव के बाद पहली बार लागू हुई नई व्यवस्था
Netherlands Child Euthanasia: नीदरलैंड में कानून संशोधन के बाद पहली बार 12 वर्ष से कम उम्र के एक बच्चे को इच्छामृत्यु (Euthanasia) दी गई है। यह मामला दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। डच अधिकारियों के अनुसार बच्चा असहनीय शारीरिक पीड़ा से गुजर रहा था और उसके ठीक होने की कोई संभावना नहीं थी। ऐसे मामलों के लिए बनाए गए सख्त कानूनी प्रावधानों और चिकित्सकीय प्रक्रियाओं का पालन करने के बाद यह निर्णय लिया गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम उन बच्चों के लिए उठाया गया है जो गंभीर और लाइलाज बीमारियों से जूझ रहे हैं तथा जिनकी पीड़ा को किसी अन्य चिकित्सा उपाय से कम नहीं किया जा सकता। हालांकि इस फैसले को लेकर नैतिक और सामाजिक स्तर पर बहस भी तेज हो गई है।
Netherlands Child Euthanasia: इच्छामृत्यु कानून पर फिर छिड़ी वैश्विक बहस
नीदरलैंड दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जहां इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता प्राप्त है। हाल ही में सरकार ने कानून में संशोधन करते हुए 1 से 12 वर्ष तक के गंभीर रूप से बीमार बच्चों के लिए भी विशेष परिस्थितियों में इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी।
Netherlands Child Euthanasia: मानवाधिकार संगठनों और चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच इस फैसले को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं। समर्थकों का कहना है कि असहनीय दर्द झेल रहे बच्चों और उनके परिवारों को राहत देने के लिए यह मानवीय कदम है, जबकि विरोधी इसे नैतिक मूल्यों के खिलाफ मानते हैं। इस घटना के बाद बाल चिकित्सा, मानवाधिकार और इच्छामृत्यु से जुड़े कानूनों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा शुरू हो गई है।





