Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple: घंटी बजी और प्रसाद लेने आ गए भालू! MP-Chhattisgarh बॉर्डर पर आस्था और प्रकृति का अनोखा नजारा; पुजारी बोले— ‘इन्हें भालू नहीं, जामवंत मानता हूँ’

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Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple

Report; Punit sen

Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले अनूपपुर से सटे छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले की सीमा पर इन दिनों आस्था, चमत्कार और वन्यजीव प्रेम का एक ऐसा विहंगम दृश्य देखने को मिल रहा है, जिसकी चर्चा दूर-बदर तक फैली हुई है। जनकपुर के पास स्थित ग्राम पंचायत उचेहरा के राजामाड़ा (रामवन) क्षेत्र में हर रोज सुबह और शाम को जब मंदिर की घंटी बजती है, तो हिंसक माने जाने वाले जंगली भालू किसी पालतू जानवर की तरह कतारबद्ध होकर भगवान का प्रसाद ग्रहण करने कुटी परिसर में पहुंच जाते हैं। धार्मिक श्रद्धा और प्रकृति के इस अनूठे मिलाप को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ पहुंच रहे हैं।

Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple साल 2013 से अनवरत जारी है यह सिलसिला, आरती की आवाज ही है इनका बुलावा

Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, भालुओं के मंदिर परिसर में आकर प्रसाद खाने का यह हैरान कर देने वाला सिलसिला पिछले 13 वर्षों (साल 2013) से लगातार बिना किसी बाधा के जारी है। जैसे ही मंदिर में सुबह-शाम की आरती की शुरुआत होती है और शंख व घंटियों की ध्वनि गूंजती है, घने जंगलों से निकलकर दर्जनों भालू सीधे कुटी परिसर का रुख कर लेते हैं। सबसे अचरज की बात यह है कि ये जंगली जानवर आश्रम में मौजूद किसी भी श्रद्धालु को कोई नुकसान नहीं पहुंचाते और शांतिपूर्वक प्रसाद ग्रहण करने के बाद वापस अपने प्राकृतिक आवास (जंगल) की ओर लौट जाते हैं।

Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple “मुझे जानवरों से नहीं, इंसानों से डर लगता है” — कुटी के संत की जुबानी

इस अद्भुत दृश्य की पड़ताल करने पहुंची मीडिया टीम के सामने भी एक दर्जन से अधिक भालू बाबा की आवाज सुनकर वहां जमा हुए और उनके हाथों से बेहद शालीनता से प्रसाद खाया। कुटी में निवास करने वाले संत (बाबा) ने बताया कि साल 2013 से पहले वे माहोरा पहाड़ क्षेत्र में रहा करते थे। जब वे राजामाड़ा (रामवन) आकर रहने लगे, तो उनके आने के कुछ महीनों बाद ही भालुओं ने यहाँ दस्तक दी, जो अब उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बाबा ने भावुक होते हुए कहा, “मैं इन्हें साधारण भालू नहीं बल्कि त्रेतायुग के ‘जामवंत’ का रूप मानता हूँ। आप इन्हें प्यार दोगे तो ये भी आपको प्यार लौटाएंगे। मुझे इन जंगली जीवों से डर नहीं लगता, बल्कि इंसानों से डर लगता है।”

Ramvan Uchhera Bear Prasad Temple चमत्कार या वन्यजीवों का स्वाभाविक व्यवहार? कौतूहल का केंद्र बना रामवन

इस अनोखी घटना को लेकर जहां एक तरफ स्थानीय ग्रामीण और दूर-दराज से आने वाले लोग इसे बाबा की दिव्य शक्ति, ईश्वर की माया और साक्षात चमत्कार मानकर शीश नवाते हैं, वहीं दूसरी तरफ वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह सालों से एक ही समय पर भोजन (प्रसाद) मिलने के कारण भालुओं के व्यवहार में विकसित हुई एक स्वाभाविक आदत (कंडीशनिंग) का हिस्सा है। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन घने जंगल के खूंखार रीछों का इस तरह आध्यात्मिक अनुशासन में बंधकर कुटी में आना इस पूरे अंचल को एक बड़े आकर्षण और धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है।

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