The human face of the khaki uniform आर्थिक तंगी से बेबस पिता की उम्मीद बनी हटा पुलिस
The human face of the khaki uniform एक गरीब पिता के लिए अपनी बेटी के हाथ पीले करना किसी चुनौती से कम नहीं होता, खासकर तब जब आर्थिक अभाव आड़े आ रहे हों। दमोह जिले के आंजनी बेलखेड़ी गांव के रहने वाले जीवन बंसल भी अपनी बेटी छोटी बंसल के विवाह को लेकर बेहद चिंतित थे। आगामी 20 जून को शादी तय होने के बावजूद तंगी के कारण वह विदाई का जरूरी सामान जुटाने में असमर्थ थे। जब कोई रास्ता नहीं सूझा, तो वे अपनी अंतिम उम्मीद लेकर हटा थाना प्रभारी सुधीर कुमार बेगी के पास पहुंचे। टीआई बेगी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए पिता को ढांढस बंधाया और हर संभव मदद का भरोसा दिया।
The human face of the khaki uniform थाना प्रभारी की अपील पर उमड़ा जनसहयोग, पल भर में जुट गई पूरी गृहस्थी
थाना प्रभारी सुधीर कुमार बेगी ने सबसे पहले बैजनाथ उदेनिया के जरिए परिवार की जमीनी हकीकत का पता लगाया। इसके बाद उन्होंने समाज के प्रबुद्ध और मददगार लोगों से इस पुनीत कार्य में सहयोग की अपील की। पुलिस की इस नेक पहल से प्रभावित होकर क्षेत्र के कई समाजसेवी (जैसे आशीष पुरानी, सुरेंद्र अग्रवाल, सरपंच भगवान सिंह लोधी, कमल सिंह लोधी, दिलावर, सोनू साहू, शीतल साहू, रवि विश्वकर्मा, राजेश यादव और अजय चौरसिया) तुरंत आगे आए। इन सभी के सामूहिक प्रयास से बेटी को उपहार स्वरूप देने के लिए सोफा सेट, पलंग, ड्रेसिंग टेबल, अलमारी, कूलर, पंखा, बर्तन और कपड़े जैसी आवश्यक सामग्रियां एकत्रित कर ली गईं।
The human face of the khaki uniform कानून व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सरोकार की अनूठी मिसाल
अक्सर पुलिस की छवि सिर्फ नियम-कायदों और कानून व्यवस्था तक ही सीमित मानी जाती है, लेकिन हटा थाना पुलिस ने वर्दी के पीछे छिपी इंसानियत की एक नई परिभाषा लिखी है। थाना प्रभारी सुधीर कुमार बेगी का इतिहास पहले भी संकटग्रस्त और जरूरतमंद परिवारों की मदद करने का रहा है, यही वजह है कि वे क्षेत्र में एक पुलिस अफसर के साथ-साथ एक संवेदनशील इंसान के रूप में भी जाने जाते हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया कि जब पुलिस और समाज एक साथ कदम बढ़ाते हैं, तो किसी भी जरूरतमंद की खुशियां अधूरी नहीं रहतीं।
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