Report: Avinash shrivastva
Monsoon Arrival in Rohtas Sasaram पिछले कई दिनों से रिकॉर्डतोड़ गर्मी, लू (Heatwave) और चिपचिपी उमस का टॉर्चर झेल रहे सासाराम के बाशिनदों के लिए आखिरकार राहत की बौछारें बरस ही पड़ीं। शनिवार को जिले के शहरी और सुदूर ग्रामीण अंचलों में तेज हवाओं के साथ करीब एक घंटे तक झमाझम मानसूनी बारिश हुई। इस अचानक हुए मौसमी बदलाव और बर्फीली हवाओं के चलने से जहाँ तपते वातावरण में ठंडक घुल गई है, वहीं भीषण गर्मी से बेहाल आम जनजीवन, बेजुबान पशु-पक्षियों और किसानों को भी बड़ी संजीविनी मिली है।
Monsoon Arrival in Rohtas Sasaram 46 डिग्री के टॉर्चर से मिली मुक्ति, सड़कों पर लौटी रौनक
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ समय से रोहतास जिले में सूर्यदेव का रौद्र रूप देखने को मिल रहा था। सासाराम में पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ते हुए 43 डिग्री से लेकर 45 और अधिकतम 46 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा था। इस जानलेवा तपिश के कारण दोपहर के समय मुख्य बाजारों और सड़कों पर पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता था और लोग अपने घरों में कैद रहने को विवश थे। इस पहली मानसूनी बारिश ने तापमान में भारी गिरावट दर्ज कराई है, जिससे पूरा मौसम सुहाना हो गया है।

Monsoon Arrival in Rohtas Sasaram लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग के बिजली संकट से भी मिली निजात
मौसम बदलने से स्थानीय नागरिकों को दोहरी राहत मिली है। शहर और ग्रामीण क्षेत्र के निवासियों ने बताया कि अत्यधिक गर्मी के कारण पिछले कई दिनों से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई थी। लगातार हो रही ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज की समस्या से लोग रात-रात भर सो नहीं पा रहे थे। इस बारिश के बाद मौसम ठंडा होने से न केवल बिजली की मांग (लोड) कम हुई है, बल्कि ट्रिपिंग की समस्या थपने से लोगों को निर्बाध बिजली का सुख भी मिल रहा है।

Monsoon Arrival in Rohtas Sasaram “गर्मी ने जीना मुहाल कर रखा था, बारिश ने दी बड़ी राहत”— स्थानीय जनता
बारिश का लुत्फ उठा रहे सासाराम के स्थानीय नागरिकों ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा:
“पिछले एक पखवाड़े से गर्मी और उमस ने आम आदमी का जीना मुहाल कर रखा था। पारा 46 डिग्री छूने से लू के थपेड़े बदन झुलसा रहे थे। आज की इस एक घंटे की मूसलाधार बारिश और ठंडी हवाओं ने वाकई लंबे समय बाद चैन की सांस लेने का मौका दिया है।”
Monsoon Arrival in Rohtas Sasaram खेती-किसानी को मिला बूस्टर डोज, किसानों के खिले चेहरे
इस मानसूनी फुहार का सबसे बड़ा फायदा रोहतास के अन्नदाताओं को हुआ है। कृषि प्रधान जिला होने के कारण सासाराम के किसान खरीफ सीजन की मुख्य फसल (धान के बिचड़े और बुवाई) के लिए आसमान की तरफ टकटकी लगाए बैठे थे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश खेतों को तैयार करने और मिट्टी की नमी (Soil Moisture) बढ़ाने के लिहाज से किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है। पानी गिरते ही किसानों के चेहरे खिल उठे हैं और वे दोगुनी ऊर्जा के साथ खेती-किसानी के काम में जुट गए हैं।



