France: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार से शुरू होने वाले अपने फ्रांस दौरे के दौरान भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक एवं रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर जोर दे सकते हैं। ऐसे समय में यह यात्रा हो रही है जब भारत समुद्री सुरक्षा और सैन्य क्षमताओं को बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र और अन्य महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच भारत अपने रक्षा ढांचे को आधुनिक बनाने पर विशेष ध्यान दे रहा है। ऐसे में फ्रांस के साथ सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
France: भारत के प्रमुख रक्षा साझेदारों में शामिल है फ्रांस
पिछले कुछ वर्षों में फ्रांस भारत के सबसे भरोसेमंद रक्षा साझेदारों में से एक बनकर उभरा है। लड़ाकू विमान, पनडुब्बियां और अन्य अत्याधुनिक सैन्य उपकरणों की आपूर्ति में फ्रांस की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
दोनों देशों के बीच चल रहे रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई परियोजनाओं और संयुक्त उत्पादन के अवसरों पर भी चर्चा होने की संभावना है। भारत की ओर से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और तकनीकी हस्तांतरण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
France: अतिरिक्त स्कॉर्पीन पनडुब्बियों की खरीद पर बढ़ सकती है रफ्तार
सूत्रों के अनुसार भारतीय नौसेना के लिए तीन अतिरिक्त स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियों की खरीद से जुड़े प्रस्ताव पर दोनों देशों के बीच बातचीत तेज हो सकती है।
योजना के तहत इन पनडुब्बियों का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और फ्रांस की रक्षा कंपनी नेवल ग्रुप के सहयोग से किया जाएगा। यह परियोजना भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं को और मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
France: 36 हजार करोड़ रुपये की परियोजना पर लंबे समय से चल रही चर्चा
रक्षा मंत्रालय करीब दो वर्ष पहले ही इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे चुका था। परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 36 हजार करोड़ रुपये बताई जा रही है।
हालांकि, तकनीकी प्रक्रियाओं, व्यावसायिक शर्तों और अन्य जरूरी पहलुओं को अंतिम रूप देने में समय लगने के कारण समझौते को अभी तक अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद से इस प्रक्रिया को गति मिल सकती है।
France: एक सप्ताह के विदेश दौरे पर रहेंगे प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री मोदी अपने एक सप्ताह के विदेश दौरे के दौरान फ्रांस और स्लोवाकिया की यात्रा करेंगे। इस दौरान वह जी-7 शिखर सम्मेलन के विभिन्न सत्रों में भी भाग लेंगे।
इसके अलावा दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकों में व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, रक्षा और वैश्विक मुद्दों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
France: राष्ट्रपति मैक्रों के साथ होगी अहम बैठक
फ्रांस प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से होगी। दोनों नेता भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा करेंगे।
बैठक में रक्षा सहयोग, संयुक्त उत्पादन, नई तकनीकों के विकास और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। दोनों देश लंबे समय से रक्षा क्षेत्र में घनिष्ठ सहयोग बनाए हुए हैं और इसे और मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
France: स्वदेशीकरण और संयुक्त विकास पर रहेगा फोकस
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने के साथ-साथ मित्र देशों के साथ संयुक्त विकास और निर्माण पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
सरकार का उद्देश्य केवल रक्षा उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है, बल्कि तकनीकी सहयोग, उत्पादन क्षमता बढ़ाने और घरेलू उद्योग को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। फ्रांस इस दिशा में भारत का महत्वपूर्ण साझेदार माना जाता है।
France: स्कॉर्पीन परियोजना में पहले ही मिल चुकी है बड़ी सफलता
भारतीय नौसेना की प्रोजेक्ट-75 योजना के तहत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने फ्रांस की नेवल ग्रुप के सहयोग से स्कॉर्पीन श्रेणी की छह पनडुब्बियों का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा किया है।
इन पनडुब्बियों के शामिल होने से भारतीय नौसेना की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब अतिरिक्त तीन पनडुब्बियों की संभावित खरीद को इसी परियोजना के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे समुद्री सुरक्षा को और मजबूती मिल सकती है।
France: रक्षा सौदों पर बनी रहेगी विशेष नजर
प्रधानमंत्री मोदी के फ्रांस दौरे के दौरान रक्षा क्षेत्र से जुड़े संभावित समझौतों और सहयोग योजनाओं पर विशेष नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लंबित परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर सहमति बनती है तो इससे दोनों देशों के रक्षा संबंधों को नई मजबूती मिलेगी और भारत की सैन्य तैयारियों को भी बड़ा लाभ होगा।
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