Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: 26/11 के अनसुने नायकों की कहानी, कंगना रनौत की दमदार वापसी या अधूरी कोशिश?

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Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: हर सप्ताह सिनेमाघरों में नई कहानियां दर्शकों के सामने आती हैं, लेकिन कुछ फिल्में सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहतीं बल्कि इतिहास के उन अध्यायों को भी सामने लाती हैं जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। कंगना रनौत अभिनीत फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ भी ऐसी ही एक कोशिश है। यह फिल्म 26/11 मुंबई आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि पर आधारित है, लेकिन इसकी कहानी उन जगहों पर नहीं जाती जिनका जिक्र आमतौर पर होता है। इसके बजाय फिल्म उस दौर के दौरान अस्पताल में ड्यूटी कर रहे नर्सिंग स्टाफ के साहस और समर्पण को केंद्र में रखती है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: शांत शुरुआत के साथ कहानी का निर्माण

फिल्म की शुरुआत बेहद साधारण और शांत अंदाज में होती है। निर्देशक ने शुरुआत से ही किसी बड़े धमाके या सनसनीखेज दृश्य का सहारा लेने के बजाय कहानी और किरदारों को धीरे-धीरे स्थापित करने का रास्ता चुना है।

मुंबई के एक सरकारी अस्पताल का सामान्य माहौल, मरीजों की आवाजाही, नर्सों की दिनचर्या और अस्पताल की रोजमर्रा की जिंदगी को विस्तार से दिखाया गया है। यह धीमी शुरुआत दर्शकों को पात्रों से जुड़ने का पर्याप्त अवसर देती है और आगे आने वाले घटनाक्रम के लिए मजबूत आधार तैयार करती है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: कामा अस्पताल की पृष्ठभूमि में बुनी गई कहानी

फिल्म की कहानी मुंबई के चर्चित कामा अस्पताल के इर्द-गिर्द घूमती है। कहानी की मुख्य पात्र गीता माधव हैं, जिनका किरदार कंगना रनौत ने निभाया है। यह किरदार वास्तविक जीवन की एक बहादुर नर्स से प्रेरित बताया गया है।

गीता अपने सहयोगियों के साथ अस्पताल में सामान्य दिनचर्या निभा रही होती हैं। फिल्म का शुरुआती हिस्सा उनके पेशेवर और पारिवारिक जीवन के बीच संतुलन को दिखाता है। लेकिन हालात तब बदलते हैं जब शहर में आतंकी हमलों की खबरें आने लगती हैं और खतरा अस्पताल तक पहुंच जाता है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: आतंकियों के प्रवेश के बाद बढ़ता है तनाव

कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है जब दो आतंकवादी अस्पताल परिसर में घुस आते हैं। इसके बाद अस्पताल का शांत माहौल अचानक भय, तनाव और अनिश्चितता से भर जाता है।

बिना किसी हथियार के नर्सें और अस्पताल कर्मचारी मरीजों की सुरक्षा के लिए संघर्ष करते दिखाई देते हैं। फिल्म का यह हिस्सा दर्शकों को लगातार बांधे रखता है और 26/11 की उस भयावह रात के कम चर्चित पहलू को सामने लाता है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: निर्देशन में दिखी संवेदनशीलता

निर्देशक मनोज तपड़िया ने इस विषय को संभालते समय अत्यधिक नाटकीयता से बचने की कोशिश की है। उन्होंने कहानी को देशभक्ति के पारंपरिक ढांचे में ढालने के बजाय मानवीय भावनाओं और साहस पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है।

अस्पताल के गलियारों में फैले डर, अनिश्चितता और तनाव को उन्होंने प्रभावी ढंग से पर्दे पर उतारा है। कई दृश्य ऐसे हैं जो दर्शकों को घटनास्थल का हिस्सा होने का एहसास कराते हैं।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: सिनेमैटोग्राफी ने बढ़ाया प्रभाव

फिल्म की सबसे बड़ी तकनीकी खूबियों में इसकी सिनेमैटोग्राफी शामिल है। कैमरे का उपयोग अस्पताल के संकरे रास्तों, सीढ़ियों और कम रोशनी वाले हिस्सों में इस तरह किया गया है कि वातावरण वास्तविक और भयावह महसूस होता है।

तनावपूर्ण दृश्यों में कैमरे की मूवमेंट और फ्रेमिंग कहानी की गंभीरता को और अधिक प्रभावशाली बनाती है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: कंगना रनौत की सधी हुई परफॉर्मेंस

कंगना रनौत ने गीता माधव के किरदार को संयमित तरीके से निभाया है। उन्होंने अपने किरदार को किसी बड़े नायक के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय एक सामान्य महिला के रूप में दिखाया है, जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्य से पीछे नहीं हटती।

उनके चेहरे के भाव और भावनात्मक दृश्यों में संतुलित अभिनय फिल्म को मजबूती प्रदान करते हैं। लंबे समय बाद कंगना एक ऐसे किरदार में दिखाई देती हैं जहां अभिनय कहानी से बड़ा नहीं लगता।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: सपोर्टिंग कलाकारों ने भी छोड़ी छाप

फिल्म की एक और बड़ी ताकत इसकी सहायक कलाकारों की टीम है। गिरीजा ओक गोडबोले, स्मिता तांबे और अन्य कलाकारों ने अपने-अपने किरदारों को पूरी ईमानदारी के साथ निभाया है।

नर्सों के बीच आपसी सहयोग, डर और साहस को जिस तरह से दिखाया गया है, वह फिल्म को और अधिक वास्तविक बनाता है। यह कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि सामूहिक साहस की कहानी बनकर उभरती है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: फिल्म की कमजोरियां भी आईं सामने

फिल्म की कुछ कमियां भी नजर आती हैं। सबसे बड़ी कमी इसका बैकग्राउंड म्यूजिक माना जा सकता है। कई गंभीर और संवेदनशील दृश्यों में संगीत अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव डालने की कोशिश करता दिखाई देता है, जिससे कुछ क्षणों की स्वाभाविकता प्रभावित होती है।

इसके अलावा अंतिम हिस्से में कहानी कई भावनात्मक और घटनात्मक परतों को एक साथ समेटने की कोशिश करती है, जिससे पटकथा की गति थोड़ी असंतुलित महसूस होती है।

Bharat Bhagya Vidhata Movie Review: क्या यह फिल्म देखने लायक है?

‘भारत भाग्य विधाता’ 26/11 के दौरान साहस दिखाने वाले उन लोगों को सम्मान देने की कोशिश है जिनका जिक्र अक्सर मुख्यधारा की कहानियों में नहीं होता। फिल्म यह संदेश देती है कि संकट के समय केवल सुरक्षा बल ही नहीं, बल्कि अस्पतालों में सेवा देने वाले लोग भी समाज के वास्तविक नायक होते हैं।

कुछ तकनीकी कमियों के बावजूद फिल्म की ईमानदार कहानी, प्रभावशाली अभिनय और संवेदनशील प्रस्तुति इसे एक बार देखने योग्य बनाती है। यदि आप इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना को अलग नजरिए से देखना चाहते हैं तो यह फिल्म आपको निराश नहीं करेगी।

रेटिंग

3.5/5 स्टार

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