Middle East: पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय नाविकों की मौत और व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने हालिया घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए वैश्विक शक्तियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के रवैये पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि नागरिक नाविकों की सुरक्षा और ऐसी घटनाओं पर विश्व समुदाय की प्रतिक्रिया में स्पष्ट असमानता दिखाई दे रही है।
Middle East: भारतीय नाविकों की मौत पर प्रतिक्रिया को लेकर उठे प्रश्न
डॉ. ब्रह्मा चेलानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में कहा कि यदि किसी हमले में अमेरिकी नागरिकों की जान जाती, तो उस घटना को वैश्विक स्तर पर कहीं अधिक महत्व मिलता। उन्होंने दावा किया कि होर्मुज क्षेत्र के पास एक टैंकर पर हुए अमेरिकी सैन्य हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई, लेकिन इस घटना को अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय ध्यान नहीं मिल पाया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय नागरिकों की मौत जैसे गंभीर मामले पर वैश्विक मीडिया और कई देशों की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत सीमित रही, जिससे कई सवाल खड़े होते हैं।
Middle East: सरकार की प्रतिक्रिया पर भी हुई चर्चा
विशेषज्ञ ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि घटना के बाद भारत सरकार की ओर से सार्वजनिक स्तर पर बहुत अधिक प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली। उनके अनुसार मामला मुख्य रूप से कूटनीतिक स्तर पर उठाया गया और विदेश मंत्रालय द्वारा औपचारिक विरोध दर्ज कराया गया।
हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक प्रक्रियाओं के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कही गई, लेकिन इस मुद्दे पर सार्वजनिक विमर्श भी तेज हो गया है।
Middle East: एक सप्ताह में कई जहाज बने निशाना
डॉ. चेलानी के अनुसार, हाल के दिनों में भारतीय नाविकों से जुड़े व्यापारिक जहाजों पर एक से अधिक घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि सप्ताह के दौरान यह तीसरी ऐसी घटना थी जिसमें भारतीय क्रू सदस्यों की सुरक्षा प्रभावित हुई।
उनके मुताबिक ओमान की खाड़ी में एक अन्य टैंकर पर भी सैन्य कार्रवाई की गई थी। इस घटना के बाद स्थानीय अधिकारियों को जहाज पर मौजूद भारतीय नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। बताया गया कि उस जहाज पर कुल 24 भारतीय नागरिक सवार थे।
Middle East: ओमान तट के पास भी हुआ हमला
विशेषज्ञ के दावे के अनुसार, ओमान तट के नजदीक एक अन्य टैंकर को भी निशाना बनाया गया। बताया गया कि जहाज के इंजन रूम में मिसाइल हमले के बाद आग लग गई थी, जिससे स्थिति गंभीर हो गई।
हालांकि राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 20 भारतीय क्रू सदस्य सुरक्षित बचा लिए गए। इसके बावजूद इस घटना ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों के जोखिम को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
Middle East: अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर बढ़ रहा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में गिने जाते हैं।
इन क्षेत्रों में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और हमलों की घटनाओं ने वहां कार्यरत हजारों नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। भारतीय नाविक वैश्विक शिपिंग उद्योग में बड़ी संख्या में कार्यरत हैं, इसलिए इन घटनाओं का प्रभाव भारत से भी सीधे तौर पर जुड़ता है।
Middle East: समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून पर नई बहस
हालिया घटनाओं के बाद यह प्रश्न फिर से चर्चा में आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के दौरान व्यापारिक जहाजों और नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होनी चाहिए। कई विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्गों की सुरक्षा केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक चिंता का विषय है।
इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय कानून, समुद्री सुरक्षा व्यवस्था और वैश्विक शक्तियों की जवाबदेही को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ दी है। साथ ही विदेशों में कार्यरत भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रश्न सामने आए हैं।
Middle East: पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव बना चिंता का कारण
पश्चिम एशिया में जारी सैन्य गतिविधियों और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री परिवहन पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर जोखिम और बढ़ सकता है। ऐसे में नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना वैश्विक समुदाय की प्राथमिकता बनना आवश्यक है।
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