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कुंभ के बाद कहा विलुप्त हो जाते है नागा साधु?

NAGA SADHU

By: Yoganand Shrivastva

प्रयागराज: महाकुंभ का आयोजन चल रहा है, 40 करोड़ श्रद्धालु का समागम इस मेले में होगा। सरकार ने पूरी तैयारी इस महाकुंभ मेले में कर ली है। महाकुंभ का नाम लेते ही एक बात पर ध्यान जाता है, वो है नागा साधु। कुंभ मेले में नागा साधु ही आकर्षण का केन्द्र होते है। इन नागा साधुओं के दर्शन सिर्फ धार्मिक मेले-आयोजन में ही होते है। वहीं नागा साधुओं को लेकर बहुत ही भ्रातियां प्रचलित है। लोग तरह-तरह की बातें करते है। वैसे तो नागा साधु हिन्दू धर्मावलम्बी साधु हैं जो कि नग्न रहने तथा युद्ध कला में माहिर होने के लिये प्रसिद्ध हैं। ये विभिन्न अखाड़ों में रहते हैं जिनकी परम्परा आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा की गयी थी। आईए आज हम आपको नागा साधुओं के बारे में विस्तार से बताते है।

ठंडे इलाकों में रहते है नागा साधु

नागा साधुओं की अपनी ही एक अलग जिंदगी है, नागा साधु अधिकतर ठंडे इलाकों में रहना पसंद करते है। यह नागा साधु कुंभ में हजारों की तादात में दिखाई देते है लेकिन मेले के समापन के बाद इनके दीदार मुश्किल हो जाते है। सवाल आता है कि यह जाते किधर है तो स्वदेश न्यूज को नागा संत बताते है कि नागा साधु का तेज काफी गर्म होता है, वह ठंडे इलाके जैसे हिमालय या फिर उत्तराखण्ड के पहाड़ों पर रहते है। नागा साधु गुफाओं में रहते है आम लोगों के बीच में नागा साधु रहना पसंद नहीं करते। वह सिर्फ तप करते है। जब धार्मिक आयोजन होते है तो अखाड़ों की तरफ से आयोजनों में जाते है, जिसका मकसद सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना होता है।

सनातन की फौज है नागा साधु

नागा संत बताते है कि नागा साधु सनातन के सिपाही हैं। सनातन को विस्तारित करने, इसे सशक्त बनाने और इसका ध्वज पूरे विश्व में लहराने के लिए नागा संतों की फौज बनाई जाती है। फिर उनको गुप्तचरों की तरह पूरे देश और विदेश में भेज दिया जाता है। वहां जाने के बाद सनातनी धर्म-संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं।

नागाओं को ठंड क्यों नहीं लगती?

ठंड नहीं लगने के पीछे भी नागा संन्यासी ने वजह बताई। उन्होंने कहा कि हम मंत्र से अभिमंत्रित करके भभूति को लगाते हैं। यह हमारे लिए विशेष कपड़े के रूप में काम करता है। इसके अलावा हम अपना जीवन नियम.संयम से जीते हैं। हम कई तरह के भोगों से दूर रहते हैं। इसलिए शरीर में ऊर्जा और अग्नि लगातार बनी रहती है। हमारा शरीर अंदर से गर्म और मजबूत बना रहता है। इससे हम मौसम की मार से बचे रहते हैं। इस सवाल के जवाब में नागा संन्यासी ने बताया कि लोगों को डरना नहीं चाहिए। असल में हम भभूत लगाकर बैठते हैं। चित्त से लेकर शरीर तक हम नग्न रहते हैं। हमें लगता है कि इसी वजह से लोगों को भय सा लगा रहता है। इसके अलावा लोगों के मन में भ्रांति बन गई है कि नागा साधु बड़े कठोर होते हैं। लेकिन असलियत यह है हमारा हृदय मक्खन की तरह से कोमल होता है। उन्होंने कहाकि हम लोगों से कहना चाहते हैं कि सारा समाज संतों की शरण में आए। किसी तरह का डर.भय न रखें। डरने की कोई जरूरत नहीं। हम नागा संन्यासी बहुत दयावान होते हैं।

क्या खाते है नागा साधु

नागा साधुओं का जीवन आसान नहीं होता है, कई परीक्षाएं देने के बाद वो साधु बन पाते हैं, इसके साथ ही उनके खानपान की बात करें तो नागा साधुओं का भोजन शुद्ध, शाकाहारी और सात्विक होता है, वो पूरे दिन में केवल एक बार ही खाना खाते हैं, इसके खाने में कंदमूल फलए जड़ी.बूटी, फल और पत्तियां शामिल होती हैं, बता दें कि अपनी तपस्या के दौरान वो पूरी तरह से प्राकृतिक चीजों का ही सेवन करते हैं, इसके अलावा वो केवल भिक्षा लेकर ही खाते हैं, नागा साधु केवल 7 घरों तक ही भिक्षा मांग सकते हैं वहां उनको जो मिलता है वो उसका ही सेवन करते हैं

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