Report: Prem Shrivastva
Royal Academy of Engineering टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग ने भारत और ब्रिटेन के बीच सर्कुलर मटेरियल्स के क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए तीन साल की नई साझेदारी की घोषणा की है। इसके तहत दोनों देशों के उद्योगों और विश्वविद्यालयों को टिकाऊ तथा पुनर्चक्रित सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल, कार्बन उत्सर्जन में कमी और महत्वपूर्ण सामग्रियों व खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।
ब्रिटेन सरकार और टाटा स्टील करेंगी करोड़ों का निवेश
Royal Academy of Engineering इस साझेदारी के लिए ब्रिटेन सरकार करीब 19 लाख पाउंड और टाटा स्टील 10 लाख पाउंड का योगदान देगी। कार्यक्रम के तहत चुनी गई परियोजनाओं को अनुदान के साथ उद्योग जगत की विशेषज्ञता और सहयोग भी मिलेगा। इसके अलावा, चयनित परियोजनाओं को मिलने वाले अनुदान की राशि के कम से कम आधे के बराबर अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इस वित्तीय मॉडल का उद्देश्य उन परियोजनाओं को आगे बढ़ाना है, जो नई तकनीकों को विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर औद्योगिक इस्तेमाल के लिए तैयार करने की दिशा में काम कर रही हैं।
भारत-ब्रिटेन के उद्योगों और विश्वविद्यालयों को मिलेगा सहयोग
Royal Academy of Engineering इस पहल के अंतर्गत दोनों देशों के उद्योग और शैक्षणिक संस्थान मिलकर टिकाऊ एवं पुनर्चक्रित सामग्रियों के इस्तेमाल से जुड़े समाधान विकसित करेंगे। साथ ही, नीतिगत स्तर पर जानकारी और अनुभव साझा किए जाएंगे, ताकि संसाधनों के दोबारा इस्तेमाल, बाजार के रुझानों और महत्वपूर्ण खनिजों की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े अवसरों को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
यह पहल भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ पहले हुए सहयोग को भी आगे बढ़ाएगी।
सर्कुलर मटेरियल्स से कम होगा संसाधनों पर दबाव
Royal Academy of Engineering भारत और ब्रिटेन दोनों के सामने बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ कार्बन उत्सर्जन और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने की चुनौती है। ऐसे में सर्कुलर मटेरियल्स यानी ऐसी सामग्रियां, जिनका दोबारा उपयोग या पुनर्चक्रण किया जा सके, महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इस क्षेत्र में नवाचार से निर्माण और विनिर्माण उद्योगों में संसाधनों की खपत कम करने, सामग्री का अधिक प्रभावी इस्तेमाल करने और कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।
टाटा स्टील ने औद्योगिक उपयोग तक अनुसंधान पहुंचाने पर दिया जोर
Royal Academy of Engineering टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट—टेक्नोलॉजी, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, एनएमबी और ग्राफीन, सुबोध पांडेय ने कहा कि कंपनी का भविष्य सर्कुलर और टिकाऊ सामग्रियों में नवाचार करने तथा उनके उपयोग को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन सरकार के सहयोग और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ साझेदारी से उपयोगी अनुसंधान को वास्तविक औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में कम कार्बन उत्सर्जन तथा संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने वाली तकनीकों को विकसित करने और अपनाने में मदद मिलेगी।
अप्रैल 2027 से शुरू होगा परियोजनाओं को सहयोग
यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के ‘ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप’ कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि सिल्वा ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक समाधान विकसित करना है, जिन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके।
उन्होंने बताया कि टाटा स्टील के साथ साझेदारी भारत और ब्रिटेन के संस्थानों तथा विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत करेगी। कार्यक्रम के तहत चयनित परियोजनाओं को अप्रैल 2027 से तीन साल तक सहयोग दिया जाएगा। इससे टिकाऊ, पुनर्चक्रित और ऊर्जा-कुशल सामग्रियों तथा प्रक्रियाओं को व्यावहारिक रूप से अपनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।


