BY: Yoganand Shrivastva
UPI त्योहारी सीजन में डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों और कारोबारियों के लिए यूपीआई से जुड़ी अहम खबर सामने आई है। चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का प्रस्ताव फिलहाल टाल दिया गया है। पहले यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की तैयारी है। नई तारीख का ऐलान अलग से किए जाने की बात कही गई है।
₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा भुगतान पर था शुल्क का प्रस्ताव
UPI प्रस्ताव के मुताबिक, ₹2,000 से अधिक मूल्य वाले चुनिंदा मर्चेंट यूपीआई लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू करने की योजना थी। हालांकि, धनतेरस और दिवाली के दौरान बाजारों में बढ़ने वाली खरीदारी को देखते हुए इसे टालने का फैसला लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारों के दौरान कारोबारियों और ग्राहकों के बीच किसी तरह की उलझन से बचने के लिए यह कदम उठाया गया है।
क्या होता है मर्चेंट डिस्काउंट रेट?
UPI मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले व्यापारी से लिया जा सकता है। यह भुगतान प्रक्रिया से जुड़ी सेवाओं के लिए निर्धारित किया जाता है। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि शुल्क किन लेनदेन और कारोबारियों पर लागू होता है।
आम ग्राहकों और दुकानदारों पर क्या पड़ेगा असर?
UPI एमडीआर लागू करने का फैसला टलने से प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में आने वाले कारोबारियों को फिलहाल राहत मिलेगी। ग्राहक भी त्योहारों के दौरान पहले की तरह यूपीआई के जरिए भुगतान कर सकेंगे। हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने की तारीख और अंतिम नियमों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करना होगा।
क्या ग्राहकों को यूपीआई भुगतान पर शुल्क देना होगा?
UPI एमडीआर का संबंध व्यापारी से लिए जाने वाले शुल्क से है। इसे सीधे ग्राहकों पर लगने वाला शुल्क समझना सही नहीं होगा। रिपोर्ट में आम ग्राहकों के यूपीआई भुगतान को मुफ्त रहने की बात कही गई है। नई व्यवस्था के लागू होने पर किन प्रकार के लेनदेन पर शुल्क लगेगा, यह अंतिम दिशा-निर्देशों से स्पष्ट होगा।
Read this: Aaj ka Mausam: मानसून की विदाई के बाद 23 राज्यों में बारिश का अलर्ट, 60 KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं


