Surguja Art Camp : पारंपरिक लोक कलाओं को सहेजने की मुहिम, संस्कृति विभाग का सरगुजा में बड़ा आयोजन
Surguja Art Camp : छत्तीसगढ़ के सरगुजा अंचल की सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और युवाओं को हुनरमंद बनाने के लिए संस्कृति विभाग एक बड़ा आयोजन करने जा रहा है। संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल के निर्देश पर आज से सरगुजा में पारंपरिक शिल्प एवं कला प्रशिक्षण शिविर ‘आकार-2026’ की शुरुआत हो रही है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देना और पारंपरिक कलाओं के जरिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करना है।

Surguja Art Camp : उदयपुर और लखनपुर में 14 जून तक चलेगा विशेष शिविर
संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह विशेष प्रशिक्षण शिविर सरगुजा के उदयपुर और लखनपुर विकासखंडों में आयोजित किया जा रहा है। आज से शुरू होकर यह शिविर 14 जून तक लगातार चलेगा। इस दौरान क्षेत्र के युवाओं, बच्चों और कला प्रेमियों को अपनी पसंदीदा विधाओं को सीखने और उनमें विशेषज्ञता हासिल करने का बेहतरीन मौका मिलेगा।

Surguja Art Camp : नृत्य, नाटक से लेकर बांस शिल्प और गोदना तक: 14 विधाओं की मिलेगी ट्रेनिंग
इस शिविर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक-दो नहीं, बल्कि कुल 14 अलग-अलग विधाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर में शामिल होने वाले प्रतिभागियों को निम्नलिखित विधाओं का हुनर सिखाया जाएगा:
पारंपरिक लोक नृत्य और नाटक (थिएटर)
चित्रकला (Painting) और क्ले आर्ट (मिट्टी शिल्प)
सरगुजा की प्रसिद्ध गोदना कला
बांस शिल्प (Bamboo Craft) और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प
इन सभी विधाओं को सिखाने के लिए प्रदेश के ख्यातिप्राप्त और सीनियर कलाकार बतौर ‘कला गुरु’ शामिल हो रहे हैं, जो प्रतिभागियों को बारीकियां सिखाएंगे।

Surguja Art Camp : मात्र ₹100 शुल्क, दिव्यांग और अनाथ बच्चों के लिए एंट्री बिल्कुल फ्री
इस शानदार प्रशिक्षण शिविर का हिस्सा बनने के लिए बेहद मामूली शुल्क रखा गया है। आम प्रतिभागियों के लिए रजिस्ट्रेशन फीस मात्र 100 रुपये है। वहीं, सामाजिक सरोकार को ध्यान में रखते हुए संस्कृति विभाग ने दिव्यांग और अनाथ बच्चों को विशेष छूट दी है; इन बच्चों के लिए पूरा प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क (फ्री) रहेगा।

Surguja Art Camp : ट्रेनिंग के बाद लगेगी प्रदर्शनी, मिलेगा सर्टिफिकेट और स्वरोजगार का मौका
‘आकार-2026’ का उद्देश्य केवल कला सिखाना ही नहीं है, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना भी है। 14 जून को प्रशिक्षण खत्म होने के बाद सभी प्रतिभागियों द्वारा तैयार किए गए शिल्पों और कलाकृतियों की एक भव्य प्रदर्शनी (Exhibition) लगाई जाएगी। इसके साथ ही, कोर्स पूरा होने पर सभी को आधिकारिक प्रमाण-पत्र (Certificate) दिया जाएगा। विभाग का विशेष फोकस इस बात पर है कि युवा इन पारंपरिक कलाओं को सीखकर अपने लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खोल सकें।





