BY
Yoganand Shrivastava
Sikkim Viral Girl Environment Message विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर सोशल मीडिया पर तमाम तरह के संदेश और वीडियो तैर रहे हैं, लेकिन सिक्किम की एक नन्ही सी बच्ची का वीडियो इस वक्त इंटरनेट पर हर किसी का दिल जीत रहा है। इस वीडियो में एक मासूम बच्ची बड़े ही प्यारे और आत्मविश्वासी अंदाज में धरती को बचाने और प्रकृति से प्यार करने की बात कह रही है। वीडियो की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश के केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा करते हुए बच्ची की जमकर तारीफ की है।
Sikkim Viral Girl Environment Message गंगटोक के DPS की LKG की छात्रा है ग्रेस वांगचुक
प्रकृति की गोद में बसे राज्य सिक्किम से आए इस वीडियो में दिख रही बेहद प्यारी बच्ची का नाम ग्रेस वांगचुक भूटिया है। ग्रेस सिक्किम की राजधानी गंगटोक में स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) की एलकेजी (LKG) की छात्रा है। वीडियो के बैकग्राउंड में खूबसूरत हरे-भरे पहाड़ और वादियां नजर आ रही हैं, जिसके बीच खड़ी होकर ग्रेस जिस बेबाकी और मासूमियत के साथ अपनी बात रख रही है, उसे देखकर हर कोई उसका मुरीद हो जा रहा है।

Sikkim Viral Girl Environment Message पेड़-पौधे और नदियां हमारी जिंदगी, इन्हें बचाना हमारा फर्ज
वीडियो में नन्ही ग्रेस बड़े ही सहज शब्दों में कहती है कि पेड़, रंग-बिरंगे पक्षी, कलकल बहती नदियां और हमारे आसपास का साफ वातावरण हमारी जिंदगी का बेहद जरूरी हिस्सा हैं। वह दुनिया भर के लोगों से ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाने और अपने आसपास की जगहों को कूड़ा-मुक्त रखने की मार्मिक अपील करती है। इतनी कम उम्र में प्रकृति के प्रति ग्रेस का ऐसा गहरा लगाव लोगों को सोचने पर मजबूर कर रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि ग्रेस की बातें ऐसी लग रही हैं जैसे खुद धरती मां बच्चों के जरिए बड़ों को अपनी जिम्मेदारी याद दिला रही हों।
Sikkim Viral Girl Environment Message “भविष्य हमें संदेश दे रहा है” — ज्योतिरादित्य सिंधिया
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जब इस वीडियो को देखा, तो वे भी खुद को इसे साझा करने से नहीं रोक पाए। वीडियो को री-पोस्ट करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बेहद खूबसूरत लाइन लिखी, “भविष्य हमें एक संदेश दे रहा है।” सिंधिया के इस पोस्ट के बाद वीडियो पर व्यूज और कमेंट्स की बाढ़ आ गई है। लोग लगातार लिख रहे हैं कि आज के डिजिटल दौर में, जहां बच्चे मोबाइल और गैजेट्स की दुनिया में खोए रहते हैं, वहां ग्रेस का प्रकृति के प्रति यह जुड़ाव एक सुखद अहसास की तरह है।





